जिले के जिन निजी अस्पतालों में 50 बेड से अधिक की व्यवस्था है, उन्हें अनिवार्य रूप से ऑक्सीजन प्लांट लगाना होगा। इसके लिए दो माह का समय दिया गया है। कोविड-19 महामारी के दौरान मरीजों के इलाज में आई दिक्कतों को देखते हुए शासन ने यह आदेश जारी किया है।
शासन से आदेश जारी होने के बाद बडे़ निजी अस्पतालों में ऑक्सीजन प्लांट लगाने की तैयारी शुरू हो गई है। जिन निजी अस्पतालों में मरीजों को भर्ती करने के लिए 60 अथवा उससे अधिक बेड हैं, वहां पर 50 प्रतिशत बेड पर ऑक्सीजन की व्यवस्था होना जरूरी है। शासन का यह भी आदेश है कि अस्पतालों में सेंट्रलाइज ऑक्सीजन पाइप लाइन की व्यवस्था होनी चाहिए। ताकि जरूरत पड़ने पर मरीजों को निरंतर ऑक्सीजन की सुविधा उपलब्ध हो सके। ऑक्सीजन प्लांट लगाने के लिए उद्योग विभाग की तरफ से मदद की जाएगी। इसके तहत ऑक्सीजन प्लांट व मशीनरी पर हुए खर्च की 25 फीसदी धनराशि अनुदान दी जाएगी। तीन साल तक निरीक्षण से छूट रहेगी।
जिला मुख्यालय पर तीन बडे़ अस्पताल हैं। जिनके यहां 100 बेड पर मरीजों को भर्ती करने की व्यवस्था है। इन अस्पतालों को प्राथमिकता से ऑक्सीजन जनरेशन प्लांट लगवाने की जरूरत है। आईएमए अध्यक्ष डा.एनके सिंह का कहना है कि अस्पताल संचालकों को निर्देश दिया गया है कि शासनादेश के तहत मानक को ध्यान में रखकर दो माह के भीतर परिसर में ऑक्सीजन प्लांट लगाकर उसकी सूचना उपलब्ध करा दें।
आईएमए के अध्यक्ष ने बताया कि संगठन से जिले के 134 अस्पतालों की सदस्यता हैं। सभी अस्पताल संचालक चिकित्सकों को सूचना दे दी गई है कि जिनके यहां मरीजों को भर्ती करने के लिए 50 से अधिक बेड की व्यवस्था है, वह अपने परिसर में ऑक्सीजन जनरेशन प्लांट स्थापित कर लें। ताकि जरूरत पड़ने पर मरीजों को ऑक्सीजन देकर उनकी जान बचाई जा सके।
वर्जन
निजी अस्पतालों को निर्देश दिया गया है कि वह शासन के गाइड लाइन का पालन करते हुए अस्पताल परिसर में ऑक्सीजन प्लांट लगवा लें। पचास से अधिक बेड वाले अस्पतालों की जांच कराई जाएगी। -डा. राकेश कुमार, सीएमओ, जौनपुर।