जौनपुर। कोरोना के बढ़ते संक्रमण के बीच जिला कारागार के बंदी और उनके परिजनों में भी भय व्याप्त है। जेल में क्षमता से तीन गुना अधिक बंदी होने के कारण यहां सामाजिक दूरी के मानक का पालन करना मुश्किल है। इससे बंदी और उनके परिजन भी हैरान हैं। पिछले वर्ष जब कोरोना का संक्रमण शुरु हुआ तो उस वक्त नए बंदियों के लिए अस्थाई जेल की व्यवस्था की गई थी लेकिन इस बार संक्रमण का खतरा अधिक होने के बाद भी अस्थाई जेल की कोई व्यवस्था नहीं है। जेल की तीन बैरकों को क्वारंटीन बैरक बनाया गया है।
करीब डेढ़ सौ साल पुरानी जेल की क्षमता 320 बंदियों की है लेकिन मौजूदा समय में इस जेल में 1050 बंदी रखे गए हैं। बंदियों की संख्या जेल की क्षमता से अधिक होने के कारण बै रकों में ठीक से सोने की भी जगह नहीं है। ऐसे में दो गज की दूरी का मानक पूरा करना बंदियों के लिए नामुमकिन है। हालांकि सीमित संसाधनों में ही जेल प्रशासन ने एहतियात बरतने की कोशिश जरूर की है। तनहाई बैरक समेत तीन बैरकों को क्वारंटीन बैरक बनाया गया है। जेल में दाखिल होने वाले नए बंदियों को इन्हीं बैरकों में निगरानी में रखा जाता है। 15 दिन क्वारंटीन रहने के बाद ही नए बंदी को दूसरी बैरक में रखा जाता है।
जेल के अस्पताल में हैं दो आक्सीजन सिलेंडर
जौनपुर। जिला कारागार के बंदी अगर कोरोना से संक्रमित हुए और उन्हें आक्सीजन सिलेंडर की जरूरत हुई तो जेल के अस्पताल में सिर्फ दो आक्सीजन सिलेंडर हैं। फिलहाल अभी किसी बंदी को आक्सीजन सिलेंडर की आवश्यकता नहीं है। अगर स्थिति बिगड़ी तो आक्सीजन सिलेंडर का भी इंतजाम करना होगा।
190 बंदियों का हो चुका है वैक्सीनेशन
जौनपुर। जिला कारागार में बंद 45 वर्ष से अधिक की उम्र वाले 190 बंदियों का वैक्सीनेशन हो चुका है। पिछले दिनों जेल के अंदर ही कैंप लगाकर बंदियों को कोरोना से बचाव के लिए वैक्सीन की दी गई है।
जेल में आने वाले नए बंदियों को क्वारंटीन बैरक में रखा जा रहा है। संक्रमण से बचाव के लिए हर संभव एहतियात बरते जा रहे हैं। सभी बंदियों को शाम को नियमित रूप से काढ़ा दिया जा रहा है।
राजकुमार
जेलर