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प्रीमियम में जमा कराए करोड़ों, क्षतिपूर्ति देने में कोताही

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जौनपुर। फसलों की क्षति होने पर प्रतिपूर्ति देने के लिए किसानों से बीमा कराने पर जोर है। हर किसान को इस योजना से जोड़ा जा रहा है। उनसे तत्काल प्रीमियम की राशि भी काट ली जाती है, लेकिन क्षतिपूर्ति देने में बीमा कंपनी की रुचि नहीं है। पिछले तीन सीजन में फसल बीमा के तहत बीमा कंपनी को 4.46 करोड़ रुपये प्रीमियम के रुप में जमा किया गया। इसमें महज 1.45 करोड़ रुपये की प्रीमियम के रुप में दिया गया है। क्षति झेलने वाले तमाम किसानों के आवेदन मानक पूरा न होने के कारण खारिज कर दिए जाते हैं।
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किसानों को ओलावृष्टि व बारिश से नुकसान हुए फसलों की क्षतिपूर्ति देने के लिए सरकार ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का संचालन किया है। किसानों का बीमा करने की जिम्मेदार एचडीएफसी एरगो बीमा कंपनी को दी गई है। इस दौरान वर्ष 2018 में खरीफ फसल के लिए 20 हजार 331 किसानों का बीमा खरीफ के सीजन में किया गया था। कुल प्रीमियम दो करोड़ नौ लाख 82 हजार रुपया जमा हुआ था, लेकिन 2665 किसानों को 73 लाख 22 हजार रुपया ही फसल क्षतिपूर्ति मिली थी। अन्य किसानों ने भी क्षतिपूर्ति के लिए क्लेम किया, लेकिन मानक पूरा न होने की दलील देकर उन्हें वंचित कर दिया गया। यही हाल वर्ष 2019 में रबी फसल के लिए 16165 किसानों का एक करोड़ 56 लाख 26 हजार रुपया प्रीमियम जमा हुआ था, जिसमें से 2807 किसानों को 65 लाख 48 हजार रुपये क्षतिपूर्ति मिली थी। वर्ष 2020 में रबी फसल में 19310 किसानों का 82 लाख 4 हजार 989 रुपया प्रीमियम जमा हुआ था, लेकिन अभी तक 500 किसानों को नौ लाख सात हजार 875 रुपये का क्षतिपूर्ति मिली है।
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1232 किसानों को फसल क्षतिपूर्ति का इंतजार
जौनपुर। पिछले वर्ष रबी सीजन में ओलावृष्टि से किसानों की फसलों को क्षति पहुंची थी। मुख्यमंत्री खुद उस क्षतिपूर्ति का जायजा लेने जिले में आए थे। उन्होंने सर्वे कराकर पीड़ित किसानों को क्षतिपूर्ति दिलाने का निर्देश दिया था। सीएम के निर्देश के बाद भी 1232 किसान ऐसे हैं, जो पिछले एक वर्ष से क्षतिपूर्ति पाने का इंतजार कर रहे हैं। बीमा कंपनी आवेदन की त्रुटि बताकर पल्ला झाड़ती रही है। पिछले दिनों डीएम की सख्ती के बाद अब इसमें तेजी आई है।
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पीएम फसल बीमा योजना के तहत किसानों का बीमा करना और उन्हें क्षतिपूर्ति देने के लिए शासन से एचडीएफसी एरगो बीमा कंपनी को जिम्मेदारी दी गई है। विभाग की ओर से उसमें सहयोग किया जाता है। एक साल पहले ओलावृष्टि से हुई फसलों के जिन किसानों को क्षतिपूर्ति नहीं मिल पाई है, उनका डाटा बैंक के माध्यम से पोर्टल पर अपलोड किया जा रहा है। इसके बाद उन्हें शीघ्र ही क्षतिपूर्ति दिलाई जाएगी। -जयप्रकाश, उप कृषि निदेशक।
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