जौनपुर। आपको यह जानकर हैरानी होगी कि आज भी जिले के 22 मजरे ऐसे हैं, जहां लोग ढिबरी-लालटेन की रोशनी पर ही निर्भर हैं। आजादी के सात दशक बाद भी यहां बिजली नहीं पहुंच पाई है। इन मजरों का चयन दीनदयालय उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना के तहत किया गया था, लेकिन 31 दिसंबर की डेडलाइन खत्म होने के सात दिन पहले तक भी बिजली इन मजरों से कोसों दूर है। केंद्र सरकार के प्राथमिकता की योजना के बावजूद निगम के जिम्मेदारों की सुस्ती यहां के लोगों के सपनों पर भारी पड़ रही है।
गांव के हर टोले-मजरे को बिजली से जगमग करने के मकसद से केंद्र सरकार ने पं.दीनदयाल उपाध्याय ग्राम्य ज्योति योजना की शुरुआत की तो जिले के 98 मजरों को इसके अंतर्गत चिह्नित किया गया। अब तक बिजली की चमक से वंचित इन गांवों के लोगों को उम्मीद जगी कि अब वह भी रात के अंधेरे में दूधिया रोशनी से अपनी झोपड़ी को रोशन कर पाएंगे। इन मजरों में बिजली पहुंचाने के लिए शासन से 15 करोड़ रुपये भी स्वीकृत कर दिए। कार्य पूरा करने की डेडलाइन 31 दिसंबर तय की गई। समय सीमा बीतने में सिर्फ सात दिन बचे हैं, लेकिन 22 मजरे अभी भी बिजली की पहुंच से दूर है। इसमें रामपुर, जामीन हिसामपुर, बरौली खास, दबिलहा खास, बेलावां चौहान बस्ती, नाऊपुर खास, सरायबीरु खास व पल्हनामऊकला आदि मजरे शामिल हैं। इसमें से कुछ मजरों में तार व पोल भी लग चुके हैं, लेकिन लेकिन कनेक्शन अब तक नहीं हो पाया है। इस कारण इन मजरों में अंधेरा पसरा रहता है। यहां रात में उजाले के लिए ढिबरी और लालटेन ही सहारा हैं। वहीं विभागीय सूत्रों की मानें तो वहां के लोगों के विरोध के कारण कार्य नहीं हो पा रहा है।