सातवां वेतन आयोग लागू हो गया है। लेकिन जिले में भारत संचार निगम लिमिटेड, मत्स्य विकास निगम समेत कुछ अन्य निगमों के कर्मचारी आज भी चौथे वेतन आयोग के वेतन पर काम कर रहे हैं।
उत्तर प्रदेश परिवहन निगम और जल निगम के कर्मचारियों को लंबे संघर्ष के बाद छठा वेतन आयोग का वेतन तो पा रहे हैं पर एक साल के बकाए के लिए वे अभी भी जूझ रहे हैं। इधर राज्य कर्मचारियों के लिए सातवां वेतन आयोग लागू हो गया। इससे निगम के कर्मचारियों में भारी असंतोष है। उनका गुस्सा कभी भी फूट सकता है।
अमर उजाला ने मंगलवार को ऐसे ही निगमों के कर्मचारियों से इस मसले पर बात की तो उनका दर्द उभरकर सामने आया। कर्मचारियों का कहना है कि वेतन में समानता न होने के कारण असमानता बढ़ेगी।
भारत संचार निगम लिमिटेड के कर्मचारी नेता सुरेश यादव कहते हैं कि उनके विभाग के कर्मचारी अभी दूसरे वेतन आयोग के वेतन पर काम कर रहे हैं। तीसरा वेतन आयोग का वेतन उन्हें 2017 से मिलेगा। उनका कहना है कि बीएसएनएल की आमदनी सुधरी है। इस नाते उन्हें भी अन्य विभागों के कर्मचारियों की तरह वेतन वृद्धि होनी चाहिए।
इसी विभाग के जेई अभिषेक वर्मा कहते हैं कि वेतन विसंगतियों के कारण समाज में आर्थिक विकास की खाई बढ़ रही है। उत्तर प्रदेश जलनिगम कर्मचारी महासंघ के प्रांतीय उप महामंत्री प्रदीप अस्थाना कहते हैं कि लंबे संघर्ष के बाद उनके विभाग के कर्मचारियों को अब जाकर छठा वेतन आयोग का लाभ मिला है।
वेतन में आसमानता से कर्मचारियों में कुंठा है। उत्तर प्रदेश जल निगम के डिप्लोमा इंजीनियर संघ के अध्यक्ष शैलेश यादव का कहना है कि डिप्लोमा इंजीनियर महासंघ की हड़ताल में इस मुद्दे को उठाया गया था लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुईा।
परिवहन निगम के जिलाध्यक्ष कमला पांडेय और शाखा मंत्री भवनाथ यादव का कहना है कि फायदे वाले निगम को राज्य कर्मचारियों के बराबर वेतन और सुख सुविधाएं मिलनी चाहिए लेकिन परिवहन निगम उनकी वाजिब मांगों को भी नजर अंदाज कर रहा है।