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Jaunpur News: हेलीकाॅप्टर से बांटी गई थीं पंडित जी रामलीला समिति की पर्चियां

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जिले की ऐतिहासिक पंडित जी रामलीला समिति का भरत मिलाप 109 वर्ष पुराना है। इसकी शोभायात्रा अहियापुर तिराहे से निकलकर ओलंदगंज तिराहे पर समाप्त होती है। यह भरत-मिलाप चार किमी लंबा होता है। समिति के पदाधिकारी बताते हैं कि 1995 में जब हेलीकाॅप्टर से इसकी पर्चियां उड़ाई गई थीं, तब इस रामलीला समिति और भरत-मिलाप का ऐतिहासिक महत्व पूरे देश में बढ़ा था। यहां की रामलीला देखने के लिए जिले के कोने-कोने से लोग जुटते हैं।
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पंडित जी रामलीला समिति टाउनहाल की शुरुआत आजादी से पूर्व करीब 1915 में पं. काशीनाथ चौबे ने की। लंबे समय तक इस रामलीला को स्थानीय कलाकार पं. काशीनाथ (सदर चुंगी) मार्ग पर कराते रहे। इसके बाद 1969 के आसपास तक महातिम तिवारी ने करीब 30 वर्षों तक इसका संचालन किया। 1970 के बाद रामलीला पं. काशीनाथ मार्ग से उठकर टाउनहाल में होने लगी। बाद में कलाकारों की कमी के कारण रामलीला को पार्टी के कलाकार करने लगे। वर्ष 1969 में नई समिति बनाई गई, जिसमें महामंत्री का पद बाबूलाल गुप्त को मिला। अध्यक्ष सीताराम गुप्त बने। उपाध्यक्ष गोपालदास बैंकर, व्यवस्थापक रामानंद जायसवाल, कोषाध्यक्ष केदारनाथ साहू के नेतृत्व में पंडित जी रामलीला समिति ने नई ऊंचाइयों को छुआ। बाबूलाल गुप्त ने महामंत्री पद पर सर्वाधिक 45 वर्ष तक कार्य किया।



पंडित जी रामलीला समिति के संरक्षक अनिल कुमार जायसवाल हरिओम ने बताया कि वर्ष 1995 में एक समय ऐसा भी आया, जब इसके पदाधिकारियों ने अपनी संपन्नता की बदौलत भरत-मिलाप में प्रचार के लिए हेलीकाॅप्टर से हैंडबिल गिराकर प्रचार करवाया। बाबतपुर एयरपोर्ट से हेलीकाॅप्टर को बुक किया जाता और करीब तीन दिन तक पर्चियों को हवा में उड़वाया जाता था, जो शहर मुख्यालय के आसपास के 20-30 गांवों में उड़ाई गई। यह क्रम 1996, 1997 तक चला। इससे भरत-मिलाप की ख्याति दिन ब दिन बढ़ती गई। समिति के महामंत्री मनोज कुमार वर्मा ने बताया कि इस बार का ऐतिहासिक भरत-मिलाप 15 अक्तूबर को होगा। इस बार टीवी स्क्रीन पर रामानंद सागर का रामायण दिखाया जा रहा है।
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