आसमान छूते दाम के चलते लोगों ने प्याज की ओर से मुंह मोड़ लिया। कई लोगों ने तो उसे खाना ही बंद कर दिया। हालाता यह है कि जिले में प्याज की खपत आधी भी नहीं रह गई है।
आढ़तिए बिना मुनाफे के ही बेचने को तैयार हैं इसके बावजूद मंडी में भारी मात्रा में प्याज डंप है। शीतला चौकिया स्थित मंडी में प्रतिदिन 80 से 100 टन प्याज की आवक थी। पिछले तीन दिनों से यहां प्याज की गाड़ी नहीं आई।
पहले से ही 240 टन प्याज डंप है उसे कोई पूछने वाला ही नहीं है। आढ़तियों को इस बात का भय है कि बारिश में ऐसे ही कुछ और दिन भी इंतजार करना पड़ा तो प्याज सड़ने लगेगी।
इस नाते वे बिना मुनाफे के ही प्याज बेचने को तैयार हैं फिर भी ग्राहक नहीं हैं। प्याज के थोक व्यापारी मो. आरिफ का कहना है कि नासिक से 52 रुपये किलो की दर से प्याज ट्रक पर लोड करके मिलती है।
उसका ट्रांसपोर्ट खर्च और यहां आने पर अनलोडिंग का खर्च प्रति कुंतल 6 रुपये बढ़ जाता है। इस हिसाब से प्रति कुंतल प्याज पर 5800 रुपये खर्च होता है।
वह पूंजी को सुरक्षित रखने के लिए 5800 रुपये कुंतल की दर से ही प्याज बेचना चाहते हैं लेकिन मंडी में ग्राहक नहीं हैं। जौनपुर मंडी में अभी पांच दिन पहले तक प्रति दिन 80 से 100 टन प्याज आती थी और 60 से 80 टन प्याज
यहां से प्रतिदिन फुटकर व्यापारी ले जाते थे। लेकिन पांच दिन से प्रतिदिन मुश्किल से 20 टन ही प्याज बिक रहा है। मंडी में 240 कुंतल प्याज अभी भी डंप है।
बाजार में 60 से 65 रुपये किलो की दर से फुटकर में प्याज बिक रहा है। प्याज के आढ़ती मो. जाहिद कहते हैं कि मंडी से थोक में प्याज ले जाकर दूकानदार फुटकर में तीन से चार रुपये प्रति किलो की दर से बढ़ा के लें तो कोई गुनाह
नहीं। पर इससे अधिक मुनाफा ले रहें हैं तो गलत है। हालांकि जौनपुर में थोक की कीमत की तुलना में 5 से सात रुपये ही अधिक दाम में फुटकर में प्याज बिक रही है।