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अब दूध-दही के उत्पाद भी बनेंगे अपने जिले की पहचान

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जौनपुर। इत्र, इमरती, मूली, मक्का के लिए चर्चित जौनपुर में अब दूध-दही और इससे बने उत्पादों को भी पहचान मिलेगी। दूध पर आधारित उत्पादों से जुड़े उद्योग स्थापित होंगे और तैयार माल के लिए बाजार उपलब्ध कराया जाएगा। पीएमएफएमई योजना के तहत शासन ने दूध आधारित उत्पादों को एक जिला-एक उत्पाद में शामिल किया है। इसे बढ़ावा देने और ज्यादा से ज्यादा लोगों को जोड़ने के लिए रूपरेखा तैयार की जा रही है।
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केंद्र सरकार की प्राथमिकता वाली प्रधानमंत्री फार्मलाइजेशन ऑफ माइक्रो फूड प्रोसेसिंग इंटरप्राइज (पीएमएफएमई) योजना में हर जिले में कृषि आधारित व्यवसाय व उद्योग को बढ़ावा देने की पहल की गई है। जौनपुर से दूध आधारित उत्पादों को इसमें शामिल किया गया है। दुग्ध उत्पादन में पहले से अग्रणी जिले में अब दूध प्रसंस्करण कर उससे नए उत्पाद बनाने और उसे जौनपुर की पहचान के साथ बाजार में उतारने की कवायद की जाएगी। दही, पनीर, मट्ठा, घी, मिल्क पावडर, दूध से बनने वाली मिठाइयां सहित तमाम चीजें इसके दायरे में आएंगे। इससे संबंधित व्यवसाय करने वालों को तो प्रोत्साहन मिलेगा ही, नए लोगों को भी अनुदान देकर जोड़ा जाएगा। उद्यान विभाग इसके लिए रूपरेखा तैयार करने में जुटा है। केंद्र सरकार की प्राथमिकता में होने के कारण प्रशासन का भी इस पर विशेष जोर है। योजना के तहत ऐसे युवाओं की तलाश शुरू कर दी गई है, जो अभी छोटे स्तर पर इससे संबंधित व्यवसाय कर रहे हैं। उन्हें प्रशिक्षण और सरकारी मदद देकर व्यवसाय बढ़ाने के लिए प्रेरित किया जाएगा।
इकाई लगाने पर दस लाख तक का अनुदान भी
दुग्ध आधारित उत्पादों से जुड़े उद्योग लगाने के लिए सरकार से मदद मिलेगी। इसकी सीमा अधिकतम 10 लाख रुपये निर्धारित है। प्रोजेक्ट लागत का अधिकतम 35 प्रतिशत सरकार की ओर से अनुदान मिलेगा। खास बात यह कि यह राशि सीधे लाभार्थी के खाते में जाएगी। उन्हें कहीं भी भटकना नहीं पड़ेगा। विभागीय पोर्टल पर वह प्रोजेक्ट की रूपरेखा के साथ ऑनलाइन आवेदन करेंगे। मुख्यालय से निर्देश के बाद जिलास्तरीय समिति उसका सत्यापन करेगी। फिर उसकी रिपोर्ट पोर्टल पर ही भेजी जाएगी। प्रस्ताव स्वीकृत होते ही सरकारी मदद की राशि खाते में पहुंच जाएगी।
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निजी उद्यमी व स्वयं सहायता समूह भी जुड़ेंगे
इस योजना में निजी उद्यमी के अलावा महिलाओं के स्वयं सहायता समूह और किसान उत्पादक संगठनों को जोड़ने पर भी विशेष जोर दिया गया है। कृषि कार्य से जुड़े होने के कारण उनके लिए दुग्ध उत्पादन से जुड़ना आसान होगा। समूह और संगठन के सदस्यों को प्रति सदस्य 40 हजार रुपये की दर से सरकारी अनुदान मिलेगा। नई डेयरी लगाने के अलावा वह उत्पादों की पैकिंग, ब्रांडिंग और मार्केटिंग से भी जुड़ सकते हैं।
दरी उद्योग को नहीं मिल पा रहा बढ़ावा
प्रदेश सरकार की ओर से संचालित एक जिला-एक उत्पाद योजना में जिले से दरी को शामिल किया गया है। उद्योग विभाग के निर्देशन में संचालित इस योजना को तमाम कोशिशों के बाद भी बढ़ावा नहीं मिल पा रहा। इसके पीछे दरी बनाने वालों का एक खास क्षेत्र तक सिमटे रहना मुख्य वजह है। दरी बनाने वाले कारीगर सिर्फ मड़ियाहूं तहसील के रामनगर, बरसठी और रामपुर ब्लाक में ही हैं। अब खाद्य प्रसंस्करण की इस योजना में दूध आधारित उत्पाद होने से जिले के हर क्षेत्र के लोग जुड़ सकेंगे।
पीएमएफएमई योजना में जिले से दूध आधारित उत्पाद को चिह्नित किया गया है। 26 जनवरी से इसकी शुरुआत करते हुए प्रधानमंत्री ने पोर्टल लांच कर दिया है। इच्छुक लोग इस पोर्टल पर सीधे ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। उनके प्रोजेक्ट की प्रमाणिकता सत्यापित करने के बाद उन्हें योजना से जोड़कर मदद दी जाएगी। -हरिशंकर राम, जिला उद्यान अधिकारी।
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