14- कोतवाली स्थित बीएसए कार्यालय में दस्तावेज जमा करने से पहले अपने कागज दुरूस्त करती शिक्षिका।
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जौनपुर। परिषदीय विद्यालयों में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नौकरी करने वाले शिक्षकों की अब खैर नहीं होगी। सभी शिक्षकों के शैक्षिक प्रमाण पत्रों की फिर से जांच कराई जाएगी। अवैध रूप से नौकरी करने वाले शिक्षकों को न सिर्फ नौकरी से बर्खास्त किया जाएगा बल्कि उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराकर वेतन के रूप में लीगई सारी रकम की वसूली की जाएगी। शासन के निर्देश के बाद जिले में सभी शिक्षकों के शैक्षिक प्रमाण पत्रों के सत्यापन के लिए टीम गठित करने का शुरू हो गया है। शासन के इस फरमान से जिले भर के शिक्षकों में हलचल मच गई है।
एक के बाद एक फर्जी शिक्षकों के हो रहे खुलासे के बाद शासन ने प्रदेश के सभी जिलों में बेसिक शिक्षा परिषद, माध्यमिक शिक्षा, और उच्च शिक्षा विभाग के स्कूल व कालेजों में तैनात सभी शिक्षकों के शैक्षिक प्रमाण पत्रों का फिर से सत्यापन कराने का आदेश दिया है। आकड़ों पर गौर करें तो जिले में परिषदीय विद्यालयों में 9962 शिक्षक तैनात हैं। जबकि अनुदानित विद्यालयों में तैनात शिक्षकों की संख्या 645 है। इनके अलावा 3319 शिक्षामित्र और 717 अुदेशकों की भी जांच होगी। 19 कस्तूरबागांधी आवासीय बालिका विद्यालयों में तैनात सभी वार्डेन और 160 शिक्षिकाओं के दस्तावेजों की जांच की जाएगी। जिले में पहले भी फर्जी शिक्षकों की तैनाती का खुलासा हो चुका है। ठीक से जांच हुई तो सैकड़ों की संख्या में फर्जी शिक्षक जेल जा सकते है।
एक साल में बर्खास्त हुए 21 शिक्षक
जौनपुर। फर्जी दस्तावेजों के आधार पर परिषदीय विद्यालयों में नौकरी करने वाले 21 शिक्षकों को एक साल के अंदर बर्खास्त किया गया है। इनमें डॉ भीम राव अंबेडकर विश्वविद्यालय मेरठ से बीएड की फर्जी डिग्री के सहारे बने शिक्षकों के अलावा दूसरे शिक्षण संस्थानों से स्नातक , बीएड समेत मोअल्लिम और कामिल की डिग्री के सहारे उर्दू शिक्षक बने लोग भी शामिल हैं।
कस्तूरबा की शिक्षिकाओं का शुरू हुआ सत्यापन
जौनपुर। फर्जी दस्तावेजों के सहारे कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिक विद्यालय में तैनात शिक्षिकाओं के सभी शैक्षिक प्रमाण पत्रों की जांच शुरू कर दी गई है। बीएसए दफ्तर में उनके मूल प्रमण पत्र के साथ एक छायाप्रति भी जमा करवाई जा रही है। शिक्षिकाओं से प्रमाणपत्र लिए जाने के बाद उन्हं उसकी रिसीविंग भी दी जा रही है। उनके शैक्षिक प्रमाण पत्रों के साथ ही स्थाई निवास की भी जांच की जाएगी। माना जा रहा है कि दूसरे के प्रमाण पत्र पर नौकरी करने वाली शिक्षिकाओं के स्थाई निवास का जब तक सत्यापन नहीं होगा तबतक नियुक्तियों में हुई गड़बड़ी का खुलासा नहीं होगा।