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अब आम की फसलों पर भी गहराया ब्लैक फंगस का संकट

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जौनपुर। ब्लैक फंगस का असर अभी तक इंसानों के लिए ही चिंता का सबब था, मगर अब आम की फसलों के भी इसकी चपेट में आने की आशंका बढ़ गई है। बिन मौसम बारिश और नमी के चलते आम की फसल में ब्लैक फंगस की चपेट में आ सकते हैं। हालांकि आम में लगने वाला यह रोग इंसानों वाले ब्लैक फंगस से काफी अलग है।
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कृषि विज्ञान केंद्र बक्शा के फसल सुरक्षा वैज्ञानिक डॉ. संदीप कुमार ने बताया कि ताउते तूफान के चलते बारिश से तापमान लुढ़का है। वातावरण में नमी आई है। यह मौसम आम की फसलों के लिए सबसे ज्यादा नुकसानदायक है। इससे आम में ब्लैक फंगस (काली फफूंद) का असर बढ़ सकता है। इसके चलते आम का डंठल कमजोर पड़ जाता और आम गिरने लगते हैं। इसके अलावा आम के फल में कोईली रोग (नीचे से काला पड़ जाना) का भी प्रकोप शुरू होने की आशंका है। इस समय वातावरण में ईंट भट्ठों की राख उड़ रही है। इसमें सल्फर डाई ऑक्साइड का असर होता है। पानी से मिलकर यह सल्फ्यूरिक एसिड का रुप लेकर आम की फलों के निचले हिस्से में जम जाता है। इससे फल का विकास रुक जाता है। इन रोगों से बचने के लिए किसान एक लीटर पानी में दो ग्राम कार्बेंडाजिम और तीन ग्राम बोरेक्स का घोल बनाकर छिड़काव कर दें।
बारिश से कद्दवर्गीय सब्जियों में भी फफूंद जनित रोग की आशंका बढ़ गई है। इसके लिए भी किसान एक ग्राम कार्बेंडाजिम और दो ग्राम मैंकोजेब की मात्रा एक लीटर पानी की दर से घोल बनाकर छिड़काव करें। उन्होंने बताया कि बारिश के बाद खाली खेत गर्मी की जोताई के लिए अनुकूल हो गए हैं। किसान खेतों की गहरी जोताई कर दें। इससे आगे धूप होने पर मिट्टी में मौजूद खरपतवार व अन्य हानिकारक किट नष्ट हो जाएंगे। कृषि विज्ञान केंद्र बक्शा के मौसम वैज्ञानिक पंकज जायसवाल का कहना है कि ताउते तूफान का असर अभी 21 मई तक बना रहने की आशंका है। इस दौरान तेज हवाओं के साथ मध्यम से हल्की वर्षा हो सकती है। तापमान में भी कमी रहेगी। कुछ इलाकों में अच्छी बारिश की भी संभावना है।
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