जिले से 10 हजार लोग प्रतिदिन लखनऊ, वाराणसी, इलाहाबाद, गोरखपुर रूटों पर यात्रा करते हैं। तपन भरी गर्मी में किसी भी रूट पर एसी बस नहीं है। ऐसे में लोगों को काफी परेशानी होती है। इन रूटों पर ट्रेनों का भी अभाव है। जो ट्रेनों हैं उसमें जगह नहीं मिलती है। जौनपुर से तकरीबन 300 बसें संचालित होती हैं।
इसमें 40 से 50 बसें अकेले लखनऊ, कानपुर, दिल्ली रूट पर जाती हैं। इलाहाबाद से जौनपुर होते गोरखपुर करीब सौ बसें प्रतिदिन आती-जाती हैं। इसके अलावा वाराणसी, मिर्जापुर, भदोही, गाजीपुर, बलिया, मऊ आदि रूटों पर भी तकरीबन डेढ़ सौ बसें संचालित हो रही हैं। जिसमें 10 हजार लोग प्रतिदिन यात्रा करते हैं।
लेकिन उन्हें मजबूरी में खटारा बसों में ही यात्रा करनी पड़ती है। कोई भी एसी बस नहीं है। वाराणसी से लखनऊ के लिए दो वोल्वो और एक शताब्दी एसी बसें जौनपुर होकर जाती तो हैं, लेकिन जौनपुर के लोगों को उसमें सीट नहीं मिल पाती है। आजमगढ़ से इलाहाबाद के लिए शताब्दी बस चलाई जा रही है, लेकिन उसमें भी यही स्थिति रहती है। जौनपुर पहुंचने पर यहां के यात्रियों के लिए सीट नहीं मिलती।