जौनपुर। या हुसैन... या हुसैन... की गूंज और मातमी नौहों के बीच जौनपुर की फिजा रविवार को ग़म में डूबी रही। मुहर्रम की 10 तारीख को कर्बला के शहीदों की याद में शहर के कोने-कोने से अकीदतमंदों का हुजूम ताजिये, अलम और ताबूत के साथ निकल पड़ा।
सदर इमामबाड़ा से लेकर गंजे शहीदा तक सड़कों पर मातम और आंसुओं का सैलाब उमड़ा रहा। पुलिस के मुताबिक जिले में कुल 135 ताजिया जुलूस निकाले गए। लाइन बाजार से निकला ताजिया जुलूस करीब 4 किमी भ्रमण कर बड़े इमामबाड़े पर जाकर समाप्त हुआ।
सुबह से ही विभिन्न मोहल्लों से छोटे-बड़े ताजिये उठे। हर ताजिये के साथ मातमी अंजुमनें चल रही थीं, जो नौहा और सोजख्वानी कर माहौल को पूरी तरह गमगीन बना रही थीं। जुलूस में शामिल युवाओं ने हजरत इमाम हुसैन और उनके साथियों की शहादत को याद करते हुए छूरी और जंजीर से मातम कर अपने शरीर को जख्मी कर लिया। खून से सने बदन और आंखों में आंसू लिए इन अकीदतमंदों की जुबान पर बस एक ही नाम था या हुसैन...।
शहर के मोहल्लों ओलंदगंज, अटाला, बेगमगंज, लाइन बाजार व कलेक्ट्री रोड से निकले जुलूस से शहर में मातम रहा। खेतासराय : नगर में सुन्नी समुदाय द्वारा यौमे आशूरा को ताजिये का जुलूस निकाला गया। देर शाम तकिया स्थित करबला में ताजिये दफन हुए।
दोपहर में नगर एवं आस-पास के 18 ताजिया चौकों से अलग समूह में ताजिया का जुलूस निकाला गया। सभी ताजियादार अपने-अपने ताज़िये के साथ फातमान गेट पर एकत्रित हुए।
यहां ताजियादारों ने फातिहा पढ़ा। यहां से सामूहिक रूप से सभी ताजिये जुलूस के रूप में जौनपुर शाहगंज मार्ग पर तकिया स्थित इमामबाड़े में दफन होने के लिए निकले। सुइथाकलां : क्षेत्र के खानबड़ेपुर, हमजापुर, सरायमोहिउद्दीनपुर, जंगीपुर, रामनगर व डकहा समेत अन्य गांवों से शिया समुदाय ने गमगीन माहौल में कर्बला वालों को याद कर ताजिये का जुलूस निकाला।
मछलीशहर :दोपहर में ताजियादारों द्वारा मातमी जुलूस निकाला गया। जरी इमामबाड़ा और सैयदबाड़ा से निकलकर जुलूस अपने निर्धारित रास्ते से हुआ कर्बला और इमाम सागर पहुंचा, जहां ताजिया दफन किया गया। कर्बला के मैदान में 40 और इमाम सागर में 3 ताजिया दफन हुए।