राष्ट्रीय फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम के तहत मछलीशहर तहसील क्षेत्र में मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एमडीए) अभियान चलाकर दवा खिलाई जाएगी। विभाग की ओर से चलाए गए नाइट सर्वे अभियान में नौ लोगों में माइक्रो फाइलेरिया के परजीवी मिले थे।
सर्वे में पाया गया कि क्षेत्र में माइक्रो फाइलेरिया रेट(एमएफ रेट) दो से अधिक (100 लोगों की जांच में दो से अधिक लोगों में माइक्रो फाइलेरिया मिले) लोगों में फाइलेरिया की शिकायत मिली थी। एमडीए अभियान 10 फरवरी से 28 फरवरी तक फाइलेरिया के मरीज खोजे जाएंगे। मच्छर जनित इस बीमारी को कम करने के लिए स्वास्थ्य विभाग प्रशिक्षण, अभियान की रणनीति बना रहा है।
लोगों में मिल रही यह शिकायत
सीएमओ डॉ. लक्ष्मी सिंह ने कहा कि फाइलेरिया मच्छर जनित रोग है। यह मादा क्यूलेक्स मच्छर के काटने से होता है। इसे लिम्फोडिमा (हाथी पांव) भी कहा जाता है। इसके प्रभाव से पैरों व हाथों में सूजन, पुरुषों में हाइड्रोसील (अंडकोष में सूजन) और महिलाओं में स्तन में सूजन की समस्या आती है। परजीवी संक्रमण फैलने के बाद इसके लक्षण पांच से 10 साल में दिखाई देते हैं। शुरू में डॉक्टर की सलाह पर दवा का सेवन किया जाए तो इस बीमारी को नियमित साफ-सफाई, देखभाल, सामान्य व्यायाम व योगा आदि की मदद इसको बढ़ने से रोक सकते हैं।
विभाग तैयार कर रहा बचाव के लिए योजना
फाइलेरिया से बचाव के लिए स्वास्थ्य विभाग अधिकारियों के सहयोग से अभियान की रणनीति, दवा वितरण रणनीति, कार्य योजना, माइक्रो प्लानिंग, एमएमडीपी प्रबंधन, डाटा रिपोर्टिंग, सुपरविजन, मॉनीटरिंग और सोशल मोबिलाइज़ेशन की रणनीति बना रहा है। स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी, बीसीपीएम और बीपीएम को मास्टर ट्रेनर बनाया गया, जो सीएचसी के समस्त संबंधित स्वास्थ्य कर्मियों को प्रशिक्षित करेंगे। अभियान में डीईसी और एल्बेण्डाज़ोल (आईडीए) की दवा खिलाई जाएगी। दवा दो वर्ष से कम उम्र के बच्चों, गर्भवती महिलाओं और गंभीर रूप से बीमार व्यक्तियों को नहीं खिलाई।