जौनपुर। कोरना की दूसरी लहर में मौतों का सिलसिला ऐसा शुरू हुआ कि कई परिवार बिखर गए, पीढ़ियां छिन गई। घर के कमासुत सदस्यों की मौत से परिवार में बचे लोगों के समक्ष आजीविका का संकट उत्पन्न हो गया है। महज 20-25 दिनों के अंदर हंसता-खेलता परिवार बिखर गया। एक साथ दो-तीन मौतों के गम ने परिवारों को बेसुध बना दिया है। किसी परिवार में मां-बेटे की मौत हुई तो कहीं पिता-पुत्र, पति-पत्नी और भाइयों ने दम तोड़ दिया। अरसे तक उन्हें इसकी पीड़ा सालती रहेगी। परिवारों में एक साथ हुई मौतों के पीछे कारण भले ही अलग-अलग रहे हों, लेकिन ज्यादातर में बीमारी के लक्ष्ण एक जैसे ही रहे। उनके लक्षण मिलते रहे और एक-दूसरे की मदद के दौरान ही परिवार के दूसरे सदस्य भी बीमारी की चपेट में आते गए।
कोरोना की दूसरी लहर ने शहर से लेकर गांव तक भारी तबाही मचाई है। इस लहर का सबसे दुखद पहलू यही रहा कि एक साथ पूरा परिवार बीमारी की चपेट में आया और फिर घर में एक से अधिक मौतों का उन्हें ऐसा गम दिया जो सदियों तक नहीं भूलेगा। सरकारी रिकार्ड में मौत का आंकड़ा भले ही कम हो, लेकिन श्मशानों पर उमड़ती भीड़ और कब्रिस्तान में सिमटती जमीन दुखद सच्चाई बयां कर रही है। संसाधनों के अभाव में समय से अस्पताल न पहुंच सकने वालों ने गांव में ही दम तोड़ दिया। कुछ इसलिए भी अस्पताल नहीं गए कि वहां की व्यवस्था पर उन्हें भरोसा नहीं था। जांच में कोताही और उपचार में देरी भी हालात को भयावह बनाने में अहम कारण रही। नतीजा एक-एक कर उन्हें परिवार के कई सदस्यों को खोना पड़ा। अब अपनों के खोने का हर तरफ विलाप और मातम है।