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कट रही जेल में जिंदगी, खता कोई नहीं

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कट रही जेल में जिंदगी, खता कोई नहीं
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मां के साथ जेल में बंद हैं 15 बच्चे, 52 किशोर
संवाद न्यूज एजेंसी
जौनपुर। बच्चे हैं। देश का भविष्य। इन्होंने कोई खता नहीं की। उम्र इतनी कम है कि खता कर भी नहीं सकते लेकिन जेल में सजा भुगतने को मजबूर हैं। जिला जेल में इस समय 15 बच्चे बंद हैं। इनकी उम्र छह साल से भी कम है। इनकी माताओं को चोरी या हत्या के आरोप में जेल में डाल दिया गया और वे भी उनके हिस्से की सजा काटने को मजबूर हैं।
जिला जेल की क्षमता 320 कैदियों को रखने की है लेकिन जेल में 1270 बंदी न्याय की प्रतीक्षा में जेल में बंद हैं। इनमें विदेशी और दुर्दांत अपराधी भी शामिल हैं। पुरुष बंदियों की संख्या 1148 है जबकि 70 महिलाएं बंद हैं। जेल में 52 किशोर भी हैं। महिला बंदियों में 11 ऐसी हैं, जिनके साथ उनके उनके बच्चे भी हैं। ऐसे बच्चों की संख्या 15 है। इनमें से कुछ महिलाएं हत्या के आरोप में जेल में हैं तो कुछ चोरी के। दो महिला बंदियों के दो और चार बच्चे जेल में हैं। इनमें एक पर चोरी तो दूसरी पर हत्या का मामला दर्ज है।
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जेल में बंद अधिकांश महिलाएं तनाव में होती हैं। उनका बच्चों के साथ व्यवहार अच्छा नहीं होता है। ऐसे में जेल प्रशासन बच्चों का ध्यान रखना पड़ता है। इनके लिए दूध और खिलौने आदि की भी व्यवस्था करनी पड़ती है। जेल अधीक्षक एसके पांडेय कहते हैं कि बच्चों की सुविधाओं का ख्याल रखा जाता है। उनकी जरूरतों को पूरा किया जाता है।
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