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ज्ञान भक्ति और कर्म की है अनूठी त्रिवेणी

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जलालपुर। ज्ञान भक्ति व कर्म की अनूठी त्रिवेणी है। गीता श्रीमद्भागवत में प्रबंध शास्त्र कुटीर उद्योग अध्यात्म ज्ञान की बात निहित है। ज्ञान भक्ति एवं कर्म को प्रधान मानकर मनुष्य को अपना कार्य करना चाहिए। उक्त बातें मुख्य अतिथि संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर हरेराम त्रिपाठी ने मंगलवार को कुटीर संस्थान के 85वां स्थापना दिवस व श्री गीता जयंती समारोह में कहा।
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कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रही पूर्वांचल विश्वविद्यालय जौनपुर के कुलपति प्रोफेसर निर्मला एस मौर्य ने कहा कि बेटियां हर दिशा में परचम लहरा रही हैं। गीता की तात्विक विवेचना करते हुए बताया कि विदेशों में व्यवहारिक शिक्षा का बोध कराया जाता है। भारत में सैद्धांतिक शिक्षा पर बल दिया जाता है, जिससे यहां के बच्चों की बुनियाद मजबूत होती है। गीता केवल ग्रंथ मात्र ही नहीं है। गीता ज्ञान है, संस्कृति है, वैराग्य है और जीवन जीने की शैली है। धन्यवाद ज्ञापन कर रहे कुटीर संस्थान के प्रबंधक डॉ. अजयेंद्र कुमार दुबे ने आए हुए अतिथियों और सेवानिवृत्त कर्मचारियों को स्मृति चिह्न और पुष्पगुच्छ देकर सम्मानित करते हुए कहा कि विद्यार्थियों के लिए अभय पहली संपदा है। अंतिम संपदा अहंकार है, जिसका त्याग कर कर राष्ट्र निर्माण में विषमताओं को झेल कर अपना महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है। इस अवसर पर प्राचार्य मेजर डॉ रमेश मणि त्रिपाठी ने आगंतुकों का अभिनंदन किया। कार्यक्रम का शुभारंभ कुलपति ने बुनियाद के तहत शिक्षा ले रहे क्षेत्रीय बच्चों को पुरस्कार देकर किया। महाविद्यालय की ओर से आयोजित क्षेत्रीय शैक्षिक प्रतियोगिता के तहत ब्लॉक के सभी प्राथमिक विद्यालयों के छात्रों तथा परीक्षा में उत्तीर्ण अध्यापकों को मेडल एवं प्रमाणपत्र देकर सम्मानित किया। संस्थान के एनएसएस, एनसीसी,रोवर और स्काउट के स्वयं सेवकों ने मुख्य अतिथि एवं अध्यक्ष का भव्य स्वागत का प्रदर्शन किया। संचालन शिक्षिका स्मृता एवं छवि गुप्ता ने किया।
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