कोरोना संक्रमण भले ही कम हो गया है, लेकिन अभी ट्रेनों का संचालन काफी कम हो रहा है। इसके चलते दीपावली के मौके पर रोडवेज की बसों पर दबाव बढ़ गया है। काफी संख्या में लोग रोडवेज की बसों से यात्रा कर रहे हैं। इससे विभाग की आय सामान्य दिनों की अपेक्षा प्रतिदिन औसतन एक लाख रुपये बढ़ गई है। हालांकि आय बढ़ने के बावजूद यात्रियों के लिए सुविधाओं में सुधार नहीं किया गया है। हालत यह है कि यात्रियों को रोडवेज की बसों में खड़े होकर यात्रा करने के लिए विवश होना पड़ रहा है। रोडवेज डिपो परिसर में भी यात्रियों की भारी भीड़ लग रही है। यात्रियों को काफी देर तक बसों के इंतजार में परिसर में कड़ा रहना पड़ रहा है। ज्यादा भीड़ लखनऊ व इलाहाबाद जाने वाले यात्रियों की पहुंच रही है।
कोरोना महामारी के कारण हुए लाकडाउन में ट्रेनों और रोडवेज डिपो की बसों संचालन रोक दिया गया था। हालांकि जैसे-जैसे संक्रमण कम होता गया, ट्रेनों और बसों का संचालन भी शुरू किया जाने लगा। इस बीच अब स्थिति कमोवेश सामान्य हो गई है, लेकिन अभी तक ट्रेनों का संचालन काफी कम हो रहा है। इसके चलते दीपावली पर्व पर गंतव्य तक पहुंचने के लिए यात्रियों को रोडवेज की बसों का सहारा लेना पड़ रहा है। इससे रोडवेज बसों पर यात्रियों का दबाव बढ़ गया है। रोडवेज डिपो की तरफ से इस समय कुल 74 बसों का संचालन किया जा रहा है। इन बसों से सामान्य दिनों में प्रतिदिन करीब आठ हजार यात्री यात्रा करते थे। इससे परिवहन निगम को प्रतिदिन औसतन सात लाख रुपये की आय हो रही थी, लेकिन इस समय दीपावली पर्व के कारण प्रतिदिन लगभग नौ हजार लोग रोडवेज की बसों से यात्रा कर रहे हैं। इससे रोडवेज की आय भी बढ़ गई है। प्रतिदिन करीब आठ लाख रुपये की आय हो रही है। उधर, सुविधाओं के अभाव में यात्रियों को गंतव्य तक पहुंचने में दिक्कतों का समाना करना पड़ रहा है। बसों में पांव रखने तक की जगह नहीं बच रही है। यात्रियों को खड़े होकर यात्रा के लिए विवश होना पड़ रहा है। परिवहन निगम के सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक विजय कुमार श्रीवास्तव का कहना है कि दीपावली पर्व के कारण यात्रियों की भारी भीड़ आ रही है। इससे यात्रियों को दिक्कत हो रही है। अगर सरेंडर हुई 11 बसें और आ गई होतीं तो इस तरह की समस्या नहीं होती। वर्तमान में सामान्य दिनों की अपेक्षा प्रतिदिन करीब एक हजार अधिक यात्री रोडवेज की बसों से यात्रा कर रहे हैं। इससे प्रतिदिन करीब एक लाख रुपये की आय भी बढ़ी है।
--
अभी 11 बसें हैं निदेशालय सरेंडर
जौनपुर। कोरोना महामारी से पूर्व रोडवेज डिपो से कुल 85 बसों का संचालन हो रहा था, लेकिन कोरोना के कारण 15 बसे निदेशालय में सरेंडर कर दी गई थीं। धीरे-धीरे स्थिति सामान्य होने पर निदेशालय में पूर्व में सरेंडर की गईं बसों के आने का सिलसिला शुरू हो गया है। पिछले माह के अंतिम सप्ताह में निदेशालय से चार बसें रोडवेज डिपो आ गई थीं। हालांकि अब भी 11 बसें निदेशालय में सरेंडर हैं।