जौनपुर। बिजली कर्मचारियों के आंदोलन से लगातार दूसरे दिन बिजली आपूर्ति ठप रही। शहर जिले के सभी 90 उपकेंद्रों से बिजली आपूर्ति बंद होने से हाहाकार मचा रहा। उमसभरी गर्मी में बेहाल लोग छटपटाते रहे। पानी के लिए वह भटकते रहे, लेकिन जनता की तकलीफ से बेपरवाह अफसर और नेता जनरेटर चलाकर चैन से सोते रहे। सरकारी कार्यालयों, आवासों में जनरेटर लगातार चलता रहा। वहां न बिजली की किल्लत हुई और न ही पानी। दूसरी ओर पूरे शहर में बिजली-पानी के लिए हाहाकार मचा रहा। कई मोहल्लों में हंगामे के बाद टैंकर से पानी पहुंचाया गया तो अधिकांश क्षेत्रों में लोग कुंओं, हैंडपंपों और निजी साधनों पर ही निर्भर रहे। लगातार 48 घंटे से दुर्व्यवस्था से लोगों का धैर्य अब जवाब देने लगा है।
निजीकरण के विरोध में बिजली कर्मचारियों ने काफी पहले ही अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार का एलान कर रखा था। सरकार ने भी इसके मद्देनजर प्रशासन को समुचित इंतजाम के निर्देश दिए थे, ताकि जनजीवन बाधित न हो। प्रशासन भी रविवार तक तो व्यवस्था बनाए रखने की खूब कसरत करते नजर आया, लेकिन जब समस्या सामने आई तो सारी तैयारी फेल हो गई। न आईटीआई के छात्र काम आए और न ही लेखपाल-पुलिस और मजिस्ट्रेट की ड्यूटी का कोई असर पड़ा। सोमवार की शाम तक 35 उपकेंद्र बंद थे तो रात तक कुल 90 में से अधिकांश उपकेंद्र बंद हो गए। उमसभरी गर्मी में लोगों ने जागकर रात काटी। असल मुसीबत को तब शुरू हुई, जब सुबह नींद खुली। ज्यादातर लोगों को भरोसा था कि सुबह तक सब ठीक हो जाएगा, लेकिन बिजली के साथ पानी का संकट भी गहरा गया। मोहल्लों में हैंडपंप, कुंओं पर पानी भरने वालों की भीड़ लगी रही तो कैंपर से आपूर्ति करने वालों के यहां भी लोग लाइन लगाकर पानी खरीदते नजर आए। किल्लत का आलम यह था कि बोतल बंद पानी खरीदकर लोगों ने अपनी प्यास बुझाई। उधर, सरकारी तंत्र पूरे दिन वार्ता और समाधान निकालने के दावे ही करता रह गया। मंगलवार की देर रात तक बिजली आपूर्ति बहाल नहीं हो पाई थी।
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रात भर उपकेंद्रों पर घूमते रहे डीएम
जौनपुर। बिजली कटौती पर जब अन्य अफसर जनरेटर चलाकर सो रहे थे तब भी डीएम दिनेश कुमार सिंह देर रात तक उपकेंद्रों पर पहुंचकर आपूर्ति चालू कराने की कोशिश करते रहे। हालांकि उनकी तमाम कोशिशों के बाद भी कोई समाधान नहीं निकल सका। उन्होंने संविदा कर्मचारियों को भी ड्यूटी पर लौटने की अपील की। उनके नाम, नंबर ढूंढकर कइयों से संपर्क साधा। तकनीकी फाल्ट होने के कारण आपूर्ति चालू कराने की सारी कवायद बेकार रही।
मांग बढ़ी तो जनरेटर वालों ने बढ़ाए रेट
जौनपुर। बिजली व्यवस्था सुचारू रहने पर लोगों को सामान्य तौर पर जनरेटर का रुख नहीं करना पड़ता था। लिहाजा जनरेटर वालों की पूछ कम हो गई थी। लगातार दो दिन की कटौती के बाद बिजली की वैकल्पिक व्यवस्था के लिए जनरेटर की ऐसी मांग बढ़ी कि संचालकों ने इसके रेट कई गुना कर दिया। एक दिन के लिए दो सौ से तीन सौ रुपये लेने वालों ने एक-एक घंटे के इतने रुपये वसूले। घर-घर जाकर वह जनरेटर का कनेक्शन देकर लोगों की टंकिया भरते रहे। अधिक रेट लेने के बाद भी उनकी मांग कम नहीं थी। आलम यह था कि साधनसंपन्न तमाम लोगों ने नए जनरेटर सेट खरीद लिए। दुकानों पर नए जनरेटर खरीदने के लिए भी भीड़ लगी रही। उधर, डिब्बा बंद पानी बेचने वालों ने भी सामान्य दिनों में 20 की बजाए मंगलवार को 25-30 रुपये रेट वसूला।
किल्लत शुरू हुई तो जनरेटर ढूंढने निकले पालिकाकर्मी
जौनपुर। सुचारु रूप से जलापूर्ति करने का भी दावा हवा हवाई साबित हुआ। प्रशासन को उम्मीद थी कि शाम तक आंदोलन खत्म हो जाएगा, लेकिन जब दूसरे दिन भी बात नहीं बनी तो आनन-फानन में जलापूर्ति तैयारी की जाने लगी। नलकूपों को चालू करने के लिए नगर पालिकाकर्मी जनरेटर ढूंढते नजर आए। इसके चलते मंगलवार को भी पूरे दिन शहरवासी पूरे दिन पानी को तरसते रह गए। कुंओं और हैंडपंपों के भरोसे लोगों ने किसी तरह काम निपटाया। इस दौरान कई सामाजिक लोग भी आगे आए। उन्होंने अपने स्तर से निजी सबमर्सिबल व जनरेटर चलवाकर लोगों को पानी उपलब्ध कराया। सरकारी आंकड़ों पर गौर करें तो शहर के सभी 23 नलकूपों पर शाम तक जनरेटर स्थापित करा दिया गया था। आठ टैंकरों से पानी पहुंचाया जा रहा था। जिले में यह संख्या 58 रही, जबकि 49 में से 44 नलकूपों को जनरेटर से चलाने का दावा किया गया है।
गरजे कर्मचारी, मांगे पूरी हुए बिना वापसी नहीं
जौनपुर। अधिकारी-कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के बैनर तले बिजली विभाग के कर्मचारियों का आंदोलन मंगलवार को भी जारी रहा। अधीक्षण अभियंता कार्यालय पर अधिकारियों-कर्मचारियों ने धरना देकर मांगों के समर्थन में आवाज बुलंद की। धरने में शामिल कर्मचारियों ने कहा कि अगर सरकार निजीकरण पर अपना फैसला नहीं बदलती तो वह भी आंदोलन से नहीं हटेंगे। इस दौरान सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी हुई। निजीकरण की नीतियों को भी कोसा। विभिन्न संगठनों ने भी धरनास्थल पहुंचकर कर्मचारियों के आंदोलन का समर्थन किया। धरना प्रदर्शन में अशोक कुमार, एके मिश्र, रामानंद मिश्र, हरीश प्रजापति, निर्भीक भारती, संजय यादव, आजाद चंद्रशेखर, असगर मेहंदी, गिरीश यादव, रामअधार, आलोक उपाध्याय आदि शामिल रहे।
उपकेंद्र पहुंचकर किया हंगामा
जौनपुर। दो दिन से बिजली कटौती से गुस्साए युवाओं ने मंगलवार को 132 केवी उपकेंद्र पर पहुंचकर हंगामा मचाया। पुलिस-प्रशासन और सरकार के साथ ही बिजली कर्मचारियों के खिलाफ भी नारे लगाए। हंगामे की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची। नियमों का हवाला देते हुए उन्हें वापस लौटनुे को कहा, लेकिन वह मानने को तैयार नहीं हुए। बाद में पुलिस ने केस दर्ज करने की धमकी दी तो वह वापस लौटे। करीब आधे घंटे तक हंगामा चलता रहा।
बिजली कर्मचारीयों की हड़ताल के चलते बिजली कार्यालय में पसरा सन्नाटा।- फोटो : JAUNPUR
दो दिन से बिजली न मिलने के विरोध में हाईडिल परिसर में बिजली बहाल करने के लिए नारेबाजी कर रहे शहर के- फोटो : JAUNPUR
हाईडिल स्थित विद्युत केंद्र पर तैनात सीओ सिटी व पुलिस फोर्स।- फोटो : JAUNPUR
हाईडिल परिसर में नीजीकरण के विरोध में आयोजित धरना प्रदर्शन में कर्मचारीयों को सम्बोधित करते विद- फोटो : JAUNPUR