मदरसों में पढ़ने वाले छात्रों के लिए प्रत्येक मदरसे में प्रति वर्ष महज 13 सौ रुपये पोषण अनुदान के नाम पर दिया जाता है। पिछले साल वह भी किसी मदरसे को नहीं मिला।
दो चार को अपवाद मान लें तो जिले के मदरसों की दशा ठीक नहीं है। जिले में कुल 102 मदरसे संचालित हैं। इनमें 12 पहले से अनुदान सूची में हैं जबकि पांच को चालू वित्तीय वर्ष में अनुदान सूची में लिया गया है।
गुरुवार को अमर उजाला ने जिले के मदरसों की पड़ताल की तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। मडिय़ाहू में स्थित मदरसा जोहरुल उलूम में पानी पीने के लिए भी कोई मुकम्मल इंतजाम नहीं है।
यहां पांचवीं तक की कक्षा में कुल पांच सौ छात्र शिक्षा ग्रहण करते हैं। कमरों की हालत ऐसी है कि जमीन पर काई जमी है। शौैचालय की दशा भी बदतर है। ओवर हेड टैंक से पीने का पानी सप्लाई किया जाता है। खेतासराय में स्थित मदरसे के
प्रबंधक प्रबंधक सैय्यद ताहिर का कहना है कि सरकार अनुदान दे तो व्यवस्था बेहतर हो सकती है। मदरसों में मदद के नाम पर एमडीएम, ड्रेस और छात्रवृत्ति ही प्रमुख है। मुंगराबादशाहपुर, खेतासराय, शाहगंज, केराकत इलाके में भी अधिकतर
मदरसों की यही दशा है। हां शहर के मदरसा हनफिया में बच्चों के रहने और खाने का इंतजाम मदरसा प्रशासन की ओर से किया गया है। जिस पर छात्रों ने भी संतोष जताया है।