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इनकी जांबाजी का कर्जदार है हर किरदार

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- घर-परिवार से दूर रहकर निभा रहे सेवा का फर्ज
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अमर उजाला ब्यूरो
जौनपुर। दुनिया भर में लाखों जिंदगियों को निगल चुकी कोरोना महामारी से बचने के लिए आम लोग घरों में है। संक्रमण से बचने के लिए अपने भी कोरोना पीड़ितों से दूरी बना ले रहे हैं। ऐसे वक्त में भी समाज में कुछ कर्मवीर ऐसे हैं, जो अपनी जान हथेली पर रखकर पीड़ितों की सेवा में पीछे नहीं है। कोई खाकी पहनकर देवदूत बना हुआ है तो कोई चिकित्सक व स्वास्थ्यकर्मी के रुप में दिन-रात पीड़ितों की जान बचाने के लिए जूझ रहा है। इन्हें पता है कि थोड़ी सी चूक न उन्हें इस बीमारी की चपेट में ले लेगी, बावजूद अपनी परवाह किए बगैर वह फर्ज निभाने से नहीं चूक रहे। घर-परिवार की चिंता वह मानवता की सेवा में पूरी शिद्दत से जुटे हुए हैं। कोरोना की जंग के इन योद्धाओं की जांबाजी का हर वर्ग कर्जदार है।
पहले मरीज की सेवा, फिर परिवार की
जौनपुर। ईशापुर निवासी नीतू जिला अस्पताल में नर्स हैं। इनकी ड्यूटी कोरोना संदिग्धों की देखभाल के लिए क्वारंटीन वार्ड में है। नीतू के परिवार में तीन छोटे बच्चे हैं। पति के न होने से बच्चों की देखरेख का जिम्मा भी उन्हीं पर है। वह सुबह छह बजे ही ड्यूटी पर निकल जाती हैं। दिन भर वार्ड में संदिग्धों की जांच व अन्य चिकित्सकीय परीक्षण में लगी रहती हैं। यहां से अपराह्न दो बजे ड्यूटी खत्म कर घर पहुंचने के बाद बच्चों की देखभाल करती हैं। बकौल नीतू, कोरोना के संक्रमण में आने का खतरा हर वक्त रहता है। न जाने किस संदिग्ध में कोरोना का लक्षण हो, मगर तीनों बच्चों के छोटे होने के कारण उनको घर पर अकेले भी नहीं छोड़ सकती। ड्यूटी से आते ही सबसे पहले कपड़ों को गर्म पानी में भिंगोती हूं। स्नान के बाद तत्काल बच्चों के लिए खाना बनाने व अन्य जरुरी कामों में निपटती हूं। मानती हूं कि इस वक्त काम कठिन हो गया है, मगर ऐसे समय में ही हमारी लोगों को ज्यादा जरुरत है। नर्सिंग सेवा में आते समय ही यह निश्चय किया था कि मरीज की सेवा सर्वोच्च प्राथमिकता रहेगी, उसे ही निभा रही हूं। परिवार की चिंता में जिम्मेदारियों से भाग जाएंगे तो फिर मरीजों का उपचार कैैसे होगा।
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वीडियो कॉलिंग से होती है घरवालों से बात
जौनपुर। जिला अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में बतौर फार्मासिस्ट तैनात विनोद कुमार श्रीवास्तव का परिवार शहर में ही रहता है। पिछले एक अप्रैल से वह इस वार्ड में ड्यूटी कर रहे हैं, जहां कोरोना पीड़ितों को रखा गया है। समय-समय पर मरीज की दवा, जांच व अन्य कार्यों का जिम्मा उन्हीं के ऊपर है। ऐसे में कोरोना का खतरा भी सबसे ज्यादा है। वार्ड में ड्यूटी लगने के बाद से वह घर नहीं जा पा रहे। अस्पताल में ही एक अन्य वार्ड में उनके साथ अन्य कर्मचारियों के रहने की व्यवस्था की गई है। विनोद श्रीवास्तव बताते हैं कि एक सप्ताह से घर नहीं गए हैं और आगे 21 दिन तक भी नहीं जाना होगा। परिवार के लोग हमेशा चिंतित रहते हैं। उन्हें फोन से इत्मीनान नहीं होता तो वीडियो कॉलिंग कर हमारा कुशलक्षेम जानते रहते हैं। उनकी चिंता वाजिब भी है, मगर हमारे लिए सबसे पहले मरीज की चिंता है। हर संक्रमित व्यक्ति को सही दवा-उपचार कर स्वस्थ बनाना ही हमारी ड्यूटी है। इसके लिए हमें कुछ भी करना पड़ा, पीछे नहीं हटेंगे।
वेतन से गरीबों को भोजन बांट रहे नरेंद्र
केराकत। बजरंगनगर पुलिस चौकी पर तैनात कांस्टेबल नरेंद्र मोहन सिंह एक माह पूर्व ही वाराणसी से स्थानांतरित होकर यहां आए हैं। इस वक्त वह सुरक्षा के साथ जरुरतमंदों की सेवा में भी जुटे हुए हैं। अपने दो माह के वेतन 87 हजार रुपये से वह गरीब, असहाय परिवारों को भोजन सामग्री बांट रहे हैं। नरेंद्र मोहन पिछले पांच दिन से बाइक से पेट्रोलिंग के दौरान कनौरा, कोइलारी, कुसुमी, जरासी, अमरौनी, सतमिश्रा, बजरंगनगर आदि स्थानों पर जाकर सभी जरुरतमंदों को राशन देने में लगे हैं। वह लोगों को अपना मोबाइल नंबर साझा करते हुए आगे भी किसी तरह की जरुरत पर याद करने का सुझाव भी दे रहे हैं। नरेंद्र मोहन बताते हैं कि कोरोना का संक्रमण फैलने के बाद से परिवार वाले रोज फोन कर चिंता जाहिर करते हैं तो मैं यही कहता हूं कि आप लोग लॉक डाउन का पालन करिए। इस समय गरीबों की मदद करने का मौका मिला है। उसे हमें निभाने देने के लिए ईश्वर से प्रार्थना कीजिए। कांस्टेबल की यह पहल पूरे क्षेत्र में चर्चा में है।
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हम भी चले जाएं तो कौन निभाए ड्यूटी
जौनपुर। जिले में एएसपी सिटी के रुप में तैनात डॉ.अनिल कुमार पांडेय की पत्नी और बेटा गाजियाबाद में है, जबकि बेटी के साथ वह जौनपुर में हैं। लॉक डाउन का पालन करवाने के साथ ही शांति-सुरक्षा का जिम्मा भी उनके कंधों पर है। ऐसे में ड्यूटी का वक्त और जिम्मेदारी बढ़ गई है। वह बताते हैं कि मार्च के तीसरे सप्ताह में ही उन्हें बेटी को लेकर गाजियाबाद जाना था, लेकिन लॉक डाउन लागू हो जाने से उन्हें रुकना पड़ा। पत्नी और बेटा रोज फोनकर आने की बात कहते हैं, लेकिन उन्हें जल्द आने की बात कह दिलासा देना पड़ता है। डॉ.पांडेय का कहना है कि दूर रहकर भी पारिवारिक जिम्मेदारियों को निभाते हुए अपने कर्तव्य का पूरी तन्मयता से निर्वहन कर रहा हूं। अपने पुलिस सेवा के कार्यकाल में आम जनता द्वारा पुलिस की इतनी प्रशंसा अब तक कभी नहीं सुनी है। आम जनता की ओर से मिल रही यह प्रशंसा ही हमारा सबसे बड़ा पुरस्कार है। यह अपनेपन की भावना को बलवती कर हमें और अधिक कार्य करने को प्रेरित करती है। मेरा मानना है कि इस समय जो दायित्व पुलिस पर आया है। उसका निष्ठापूर्वक निर्वहन कर हम अपनी सेवा को सफल बना सकते हैं।
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