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Jaunpur News: आडिट में क्लीन चिट के लिए मांगे थे 50 हजार, तीस हजार लेते पकड़ा गया

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मछलीशहर। रोडवेज परिसर से एंटी करप्शन टीम ने शुक्रवार को विकास भवन में तैनात ज्येष्ठ लेखा परीक्षक को 30 हजार रुपये लेते गिरफ्तार किया है। ग्राम प्रधान के पुत्र वीरेंद्र कुमार की शिकायत पर वाराणसी की एंटी करप्शन टीम ने कार्रवाई की है। आरोपी ने 50 रुपये की मांग की थी।
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नेवढ़िया थाना क्षेत्र के परशुरामपुर गांव निवासी पीड़ित वीरेंद्र कुमार ने एंटी करप्शन टीम प्रभारी से शिकायत की कि उसकी मां सुदामा जो ग्राम प्रधान हैं, उनसे ग्राम सभा में कराए गए कार्य के आडिट में क्लीन चिट के लिए 30 हजार रुपये रिश्वत की मांग की गई है। शिकायत को संज्ञान लेते हुए एंटी करप्शन वाराणसी की टीम ने जाल बिछाकर शुक्रवार को दोपहर 12 .30 बजे 30 हजार रुपये घूस लेते ज्येष्ठ लेखा परीक्षक सत्य नारायण को रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया। आरोपी की तैनाती लेखा परीक्षा विभाग विकास भवन में है। आरोपी घाटमपुर पोस्ट मेलारा बेलवाई माधोपुर,अखंडनगर सुल्तानपुर का रहने वाला है। गिरफ्तारी के बाद टीम उसे सिकरारा थाने में ले गई। वहां मुकदमा दर्ज कराया गया। ऑडिटर को गिरफ्तार करने वाली टीम में निरीक्षक मैनेजर सिंह, ट्रैप टीम प्रभारी वाराणसी नीरज कुमार सिंह आदि शामिल रहे। सिकरार एसओ अमित कुमार सिंह ने बताया कि लेखा परीक्षक के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की जा रही है।
वित्तीय वर्ष 2024-25 की पांचवीं कार्रवाई-एंटी करप्शन टीम के मुताबिक वर्ष 2025 में जौनपुर में यह पहले कार्रवाई है। हालांकि वित्तीय वर्ष 2024-25 में अब तक एंटी करप्शन द्वारा कुल पांच कार्रवाई की जा चुकी है। वाराणसी मंडल में देखें तो एंटी करप्शन की कार्रवाई सबसे अधिक गाजीपुर इसके बाद जौनपुर में ही हुई है।
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दस हजार रुपये ने बिगाड़ा खेल-पीड़ित वीरेंद्र कुमार ने बताया कि उसके गांव के लेखा परीक्षण के लिए आरोपी सत्य नारायण ने पहले 50 हजार रुपये की मांग की थी। वीरेंद्र ने बताया कि पैसे देने में विलंब हुआ तो सत्य नारायण ने उसे 10 हजार रुपये और यानी कुल 60 हजार रुपये देने को कहा। यही नहीं बताए गए समय पर पैसा न देने के कारण सत्य नारायण ने रिकवरी कराने की धमकी भी दी थी। इसी क्रम में एंटी करप्शन ने 30 हजार रुपये लेते हुए सत्य नारायण के खिलाफ कार्रवाई की है।
प्रत्येक ग्राम सभा से जांच के नाम पर हर साल 50 लाख की होती है वसूली -पीड़ित वीरेंद्र व अन्य ग्राम प्रधानों के मुताबिक प्रत्येक ग्राम सभा से जांच के नाम पर नवंबर महीने से 50 हजार रुपये की वसूली की जाती है। पैसे न देने वाले प्रधानों पर जांच में फंसाने व उनके खिलाफ मुकदमे की धमकी क्षेत्रीय सचिवों द्वारा दी जाती है। प्रधानों ने बताया कि उनके ब्लॉक से ही पिछले वर्ष 50 लाख रुपये वसूले गए। प्रधानों ने आरोप लगाया है कि यह पैसे सचिव के माध्यम से उच्चाधिकारियों तक पहुंचाया जाता है।
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