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शहीद के परिजनों को भूली सरकार, गेट बना न लगी प्रतिमा......

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द्दिकपुर के भकुरा गांव में शहीद राजेश सिंह को श्रद्धांजलि देते परिजन। - फोटो : JAUNPUR
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करंजाकला। उड़ी हमले में शहीद राजेश सिंह की शहादत के चार साल बाद भी सरकार परिजनों से किया वादा पूरा नहीं कर पाई है। शहीद के गांव जाने वाली सड़क का नामकरण तो कर दिया गया लेकिन आज तक न तो शहीद द्वार बना है और न ही प्रतिमा लगवाई गई। मृतक आश्रित को नौकरी तो दूर माता-पिता के हिस्से में आने वाले पांच लाख रुपये का भी भुगतान नहीं किया गया है।
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भकुरा गांव निवासी राजेंद्र सिंह के पुत्र राजेश सिंह 18 सितंबर 2016 को उड़ी में हुए हमले में शहीद हो गए थे। श्रद्धांजलि देने आए अफसरों ने एक आश्रित को नौकरी देने, गांव की सड़क का नामकरण करने, शहीद गेट बनाने और गांव में राजेश की प्रतिमा लगाने, पांच बीघे जमीन देने का भी वादा किया था। माता-पिता को उम्मीद थी कि सरकारी इमदाद बिना किसी मुश्किल के मिल जाएगी लेकिन चार साल बाद भी कुछ नहीं मिला। पिता राजेंद्र सिंह बताया कि सरकार ने दो नंबरों में पांच बीघा जमीन देने का वादा था, लेकिन एक जगह जमीन देकर जगह पांच लोगों के नाम से पट्टा कर दिया। सिद्दीकपुर चौराहे पर शहीद स्मृति द्वार बनवाने का वादा भी अधूरा है। प्रतिमा नहीं लगाई गई। माता-पिता के नाम से पांच लाख रुपया देने का वादा था जो अब तक पूरा नहीं हुआ। यह दीगर बात है कि इसके पूर्व शहीद जवानों के परिजनों को यह राशि दे दी गई है। राजेश सिंह की पत्नी जूली एमए, बीएड हैं, लेकिन उनको नौकरी नहीं मिली है। गाजीपुर में आए तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कई वादे किए लेकिन पूरे नहीं हुए। राज्यमंत्री और डीएम से कई बार गुहार लगाई गई लेकिन कुछ नहीं हुआ। वह शीघ्र ही सीएम से मुलाकात करेंगे।
श्रद्धांजलि सभा में किया शहीद को नमन
करंजाकला। क्षेत्र के भकुरा गांव निवासी राजेश सिंह को शहादत दिवस पर नमन किया गया। इस दौरान सिद्दीकपुर से जमुआही जाने वाली सड़क का नामकरण शहीद राजेश सिंह के नाम पर करते हुए शिलापट्ट लगाया गया। आवास पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अंतिथि बीएचयू के डॉ आदित्य कुमार सिंह रहे। उन्होंने कहा कि राजनैतिक शहीद बनाम वास्तविक शहीद का युग चल रहा है। राजनैतिक शहीदों के नाम से अनेक प्रकार के संस्थानों में नाम जोडे़ जा रहे हैं, लेकिन देश के लिए शहीद हुए राजेश सिंह के नाम से किसी संस्थान में नाम जोड़ा नहीं गया। यहां के लोग उचे स्तर तक इस मामले को पहुंचा नहीं पाए, वरना शहीद के नाम पर भी कोई संस्थान जरुर होगा। कार्यक्रम में जेपी सिंह, अभिमन्यू, मनोज उपाध्याय, श्रीकांत सोलंकी सहित सैकड़ों ग्रामीण व परिजन मौजूद रहे। संचालन राजकुमार सिंह ने किया।
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