गोमती का पानी जलचरों के लिए जहर बन चला है। जल में आक्सीजन की मात्रा तेजी से घट रही है। शहर के शास्त्री पुल के समीप गोमती से लिए गए सैंपल में डीओ (डिजाल्व आक्सीजन) 4.2 मिलीग्राम प्रति लीटर पाया गया है,
जो खतरे की घंटी है। जानकारों के मुताबिक डीओ पानी का स्वास्थ्य बताता है। इसकी मात्रा 5.0 मिग्रा/लीटर से ज्यादा रहनी चाहिए।
गंगा को अविरल-निर्मल बनाने के लिए एक्शन प्लान के नाम पर भले ही अरबों रुपये पानी की तरह बहाए जा रहे हों, लेकिन उसकी सहायक नदियों को स्वच्छ किए बिना गंगा को निर्मल नहीं किया जा सकता।
ऐतिहासिक शहर जौनपुर में जीवनदायिनी गोमती बेनूर हो रहीं हैं। शहर के बेकाबू नाले-नालियों का दूषित पानी और कचरा गोमती के जल में जहर घोल रहा है। संकट मोचन फाउंडेशन की स्वच्छ गंगा रिसर्च लेबोरेटरी ने गोमती के जल की जो परीक्षण रिपोर्ट दी है, वह भयावह है।
रिपोर्ट के मुताबिक यही हाल रहा तो आने वाले 15 से 20 वर्षों में गोमती का समूचा जल विषाक्त हो जाएगा। तब हालात बेकाबू हो जाएंगे।
बीएचयू के न्यूरोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष डा. वीएन मिश्रा के मुताबिक जौनपुर शहर के विसर्जन घाट पर नदी के पश्चिमी घाट, पूर्वी घाट और मध्य में के जल का परीक्षण किया गया। पश्चिमी घाट पर टीडीएस (टोटल डिजाल्व सालिड) 320 मिग्रा. प्रति लीटर, डीओ 8.2 और फीकल कालीफाम आठ हजार प्रति एक हजार मिली. की दर से पाए गए।
पूर्वी तरफ टीडीएस 290, डीओ 10 और फीकल कालीफाम 23 हजार दर्ज किया गया। मध्य में ये क्रमश: 300, 10.4 और 17 हजार पाए गए। शहर से बाहर निकलती नदी के जल की हालत बेहद खस्ता मिली।
शास्त्री पुल के नीचे किए गए परीक्षण में टीडीएस 430, डीओ 4.2 और फीकल कॉलीफाम दो लाख 40 हजार दर्ज किया गया। डा. मिश्रा के मुताबिक इससे जाहिर है कि जौनपुर शहर में गोमती का जल बेहद प्रदूषित हो चुका है।
डीओ का लेवल पांच से कम नहीं होना चाहिए। इसके चलते यह मछलियों और अन्य जलचरों के लिए खतरनाक बन चला है।