जौनपुर। गोमती नदी को प्रदूषण से मुक्त कराने के लिए वादे तो खूब हुए लेकिन कोई भी कार्ययोजना धरातल पर नहीं उतर सकी। नतीजा यह कि आज भी आदि गंगा गोमती प्रदूषण एवं गंदगी से कराह रही है। करीब एक साल पहले तत्कालीन नगर विकास राज्यमंत्री गिरीशचंद्र यादव के प्रयास से सीवर लाइन की मंजूरी सरकार से मिली जरूर लेकिन कोई कार्ययोजना अभी तक जमीन पर नहीं उतर सकी। शहर के छोटे बड़े 21 गंदे नाले सीधे नदी में गिर रहे हैं। शहर के मध्य शाही पुल और सद्भावना पुल के बीच तीन दिनों से तीन मवेशियों के शव नदी में ही सड़ रहे हैं। नदी का पानी बदरंग हो गया है।
गोमती में प्रदूषण की स्थिति विगत दो दशक से जस की तस बनी हुई है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों की ओर से इस दिशा में कोई सकारात्मक पहल नहीं की गई। नदी में नालों का केमिकल युक्त पानी का बहना सबसे बड़ी समस्या है। इसके अलावा नदी के किनारे खुले में शौच गंदगी को बढ़ावा दे रहा है। पूर्व सांसद केपी सिंह ने 25 मई 2015 को 300 करोड़ का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजने की बात कही थी। इसके तहत नदी के दोनों किनारों पर सड़क का निर्माण और सुंदरीकरण किया जाना था। प्रदेश की पूर्व मंत्री डा. रीता बहुगुणा जोशी ने भी गोमती नदी का निरीक्षण कर नदी को प्रदूषण से मुक्त कराने, घाटों को पक्का बनाकर का वादा किया था। मगर इनमें से कोई वादा हकीकत में नहीं बदल पाया।
गोमती नदी जिले में तकरीबन 70 किमी का सफर तय करती है। यह नदी पांच विधानसभा क्षेत्रों बदलापुर, मल्हनी, जौनपुर, जफराबाद और केराकत से होकर गाजीपुर जिले में गंगा में मिल जाती है। नगरीय क्षेत्र में गोमती में प्रदूषण को रोकने के लिए नया सीवरेज सिस्टम लगवाने के लिए केंद्रीय नगर विकास मंत्रालय से अमृत योजना के तहत तकरीबन 300 करोड़ रुपये की मंजूरी पिछले साल ही मिल चुकी है लेकिन उसपर अभी कोई काम शुरू नहीं हो सका।
राष्ट्रपति को भी भेजा गया है प्रस्ताव
जौनपुर। नगरीय क्षेत्र में नालों को बंद कराये जाने के लिए स्वच्छ गोमती अभियान ने गोमती एक्शन प्लान का प्रोजेक्ट केंद्र सरकार को सौंपा है। इसके अलावा तत्कालीन केंद्रीय जल संसाधन मंत्री सुश्री उमा भारती, मंत्री नितिन गडकरी, राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को भी सौंपा है। गोमती एक्शन प्लान का प्रोजेक्ट स्वच्छ गोमती अभियान की हाई पावर कमेटी के अध्यक्ष व देश के जाने माने केमिकल इंजीनियर प्रो. इंद्रमणि मिश्र के नेतृत्व में देश के चार प्रमुख विश्वविख्यात वैज्ञानिकों द्वारा बनाया गया था। इस प्रोजेक्ट का सिविल डिजाइन टिहरी बांध के जनक कहे जाने वाले प्रो. एके काजमी ने किया। इनके अलावा बीएचयू के प्रो. सिद्धनाथ उपाध्याय, आईआईटी रुड़की से प्रो. विमलचंद श्रीवास्तव, दिल्ली से प्रो. विवेक कुमार, खड़गपुर से प्रो. अमित मित्तल ने प्रस्ताव बनाए थे।
गंदगी देख पूर्व न्यायमूर्ति ने भी जताई थी नाराजगी
जौनपुर। पूर्व न्यायमूर्ति उच्च न्यायालय इलाहाबाद एवं चेयरमैन ईस्टर्न यूपी रिवर एंड वाटर रिसोर्स मानीटरिंग कमेटी डीपी सिंह ने एक फरवरी 2019 को जिले में आए थे। गंदगी एवं प्रदूषण से कराह रही गोमती नदी की स्थिति भी उन्होंने नजदीक से देखा था। उस वक्त उन्होंने तत्कालीन डीएम को निर्देश देते हुए कहा था कि गोमती और सई नदी के दोनों तरफ शहर से पांच किलोमीटर के अंदर सर्वे कराकर पौधरोपण कराएं और डी-सिल्टिंग का कार्य भी कराएं। उन्होंने पूरा प्रोजेक्ट तैयार कर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे। कहा कि कचरे के निस्तारण के लिए ट्रीटमेंट प्लांट लगाएं जाने पर तेजी से कार्य किया जाए। बावजूद इसके कुछ बदलाव नहीं हुआ।
नदी को प्रदूषण से मुक्त कराने के लिए यह है प्लान
जौनपुर। गोमती नदी को प्रदूषण से मुक्त कराने के लिए अटल नवीकरण और शहरी रूपांतरण मिशन के तहत सीवरेज योजना की मंजूरी पिछले साल ही शासन से मिल चुकी है। इस पर 302 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। सीवर लाइन बनने के बाद नदी में नालों का गंदा पानी गिरना बंद हो जाएगा। नालों के पानी को सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के जरिए शोधित किया जाएगा। सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के लिए 206 करोड़ रुपये की मंजूरी मिल चुकी है।