किसानों को सूखा राहत की राशि देने समेत कई अन्य मांगों को लेकर शनिवार को भारतीय किसान यूनियन भानु गुट के बैनर तले कलेक्ट्रेट में जुटे किसानों ने हुंकार भरी।
साथ ही चेतावनी दी कि किसानों की समस्याओं का समाधान शीघ्र नहीं हुआ तो वे सरकार के खिलाफ बड़ा आंदोलन खड़ा करेंगे। अपनी मांग से संबंधित मुख्यमंत्री को संबोधित 11 सूत्री पत्रक जिलाधिकारी को सौंपा।
जिलाधिकारी कार्यालय के सामने किसानों ने जमकर प्रदर्शन किया और सरकार के खिलाफ नारे लगाए। यहां आयोजित धरना सभा को संबोधित करते हुए किसान नेताओं ने कहा कि पिछले साल सूखे के कारण किसानों को भारी क्षति हुई
थी। पीड़ित किसानों का आंसू पोंछने के लिए सरकार ने इस जिले को भी सूखा घोषित करते हुए सहायता देने की घोषणा की थी लेकिन सरकारी मदद की राह देख रहे किसानों की आंखें अब पथरा गई हैं। एक साल का वक्त गुजरने
वाला है लेकिन किसानों को सरकारी मदद नहीं मिली। जो कुछ सहायता धनराशि मिली भी तो वह लोहिया गांव के किसानों तक ही सिमट कर रह गई। वहां भी मदद का कोई मानक समझ में नहीं आया। तमाम दुश्वारियों को झेलते
हुए किसान किसी तरह खेती कर देश का पेट भरने में लगे हैं। संगठन के जिलाध्यक्ष अमरनाथ यादव ने कहा कि बैंक से लिया गया पचास हजार तक का कर्ज किसानों का माफ किया जाना चाहिए।
लेकिन इसके लिए सरकार की ओर से कोई घोषणा नहीं की गई। जबकि सूखे के बाद से इसकी मांग होती आ रही है।
अवधेश यादव ने कहा कि किसान परेशान हैं फिर भी साधन सहकारी समितियों से उन्हें निर्धारित दर से अधिक मूल्य पर यूरिया और डीएपी खरीदनी पड़ रही है। विभीगीय अधिकारी इसके प्रति मौन हैं।
चौतरफा किसानों पर ही आफत आ रही है। लेकिन किसानों की समस्या के प्रति जिम्मेदार अफसर, नेता कोई भी संवेदनशील नहीं दिख रहा है। रामनाथ यादव, अमृतलाल, राजमनि, बाबूराम, रामसूरत, अशोक मिश्रा, विद्या गौतम, गीता देवी, लालजी, राजधारी ने भी संबोधित किया।