बुधवार को बंद सिविल लाइन स्थित एसबीआई की मुख्य शाखा।
मंगलवार की आधी रात के बाद से पांच सौ और एक हजार के नोट बंद किए जाने की खबर से बुधवार को अफरातफरी का माहौल रहा। रोडवेज की दूध वाले से लेकर, जनरल स्टोर, रोडवेज बस, आटो रिक्शा, चाय-पान की दूकानों, ठेला, खुमचा पर दूकान लगाने वाले सब्जी, फल आदि के दूकानदारों के यहां ग्राहकों से किचकिच होती रही।
अस्पताल में मरीजों के तीमारदार भी परेशान हैरान होते देखे गए। पेट्रोल पंप पर बड़े नोट जरूर लिए जा रहे थे पर जितने की नोट उतने का पेट्रोल लेना पड़ा। किसी भी पेट्रोल पंप पर बड़े नोट लेने के बाद फुटकर वापस नहीं किया गया। इससे भी लोगों को परेशानी हुई।
सफर कर रहे मुसाफिरों को भी ऐसी परेशानियों का सामना करना पड़ा। अमर उजाला ने बुधवार को बड़े नोट बंद होने के बाद बाजारों की पड़ताल की तो कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला। जिला अस्पताल में अपनी पत्नी का इलाज कराने आए सुतौली गांव निवासी रामसजीवन बिंद बाहर से दवा लेने के लिए पांच सौ रुपये का नोट लेकर मेडिकल स्टोरों का चक्कर
लगाते रहे लेकिन लेकिन कोई नोट लेने को तैयार नहीं हुआ। यही परेशानी जफराबाद के सुरेश चंद्र विश्वकर्मा की भी रही। दूध के कारोबारी कलीचाबाद निवासी रामू यादव की माने तो जो भी दूध लेने पहुंचा पांच सौ या एक हजार का नोट पहले निकालता था। जब लोगों को पता चलता कि बिना फुटकर के दूध नहीं मिलने वाला तभी वे फुटकर रुपये दिए और दूध ले गए।