विनोद के ललकारने पर सोनू ने तमंचे से फायर कर दिया। बीच-बचाव के लिए आए आशीष के सीने में गोली लगी। वह गंभीर रुप से जख्मी हुआ। उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। आशीष के चाचा राजकुमार की तहरीर पर पुलिस ने पिता विनोद तिवारी व पुत्र सोनू तिवारी के विरुद्ध केस दर्ज किया था।
विवेचना के बाद चार्जशीट कोर्ट में प्रस्तुत की। सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता लालबहादुर पाल ने मुकदमे की पैरवी की। दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने और साक्ष्यों के परीक्षण के बाद कोर्ट ने पिता-पुत्र को आशीष की हत्या का दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। दस-दस हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया। सुनवाई के दौरान पिता-पुत्र कोर्ट में ही मौजूद रहे। पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।