बेमौसम बारिश से बर्बाद हुई खेती के लिए किसानों को मुआवजा दिए जाने समेत सात सूत्री मांगों के लेकर राष्ट्रीय लोक दल (रालोद) ने मंगलवार को कलेक्ट्रेट पर धरना दिया। साथ ही राज्यपाल को संबोधित पत्रक जिलाधिकारी को सौंपा।
रालोद के जिलाध्यक्ष सत्येंद्र सिंह की अध्यक्षता में आयोजित धरना सभा में वक्ताओं ने कहा कि सरकार ने अगर किसानों की मदद नहीं की तो किसान टूट जाएंगे। हुदहुद तूफान से धान की फसल पहले ही बर्बाद हो चुकी है।
अब बेमौसम बारिश से गेहूं और दलहन और तिलहन की फसल भी चौपट हो गई। ऐसे में किसानों को सरकारी मदद की आवश्यकता है। सरकार को चाहिए कि वह किसानों को उबारने के लिए कोई ठोस नीति बनाए। जिलाध्यक्ष ने कहा कि दैवी आपदा से पीड़ित किसानों को मुआवजा देने के लिए सरकार ने दो करोड़ की राशि जारी की है। यह राशि इतने बड़े प्रदेश के लिए ऊंट के मुह में जीरा समान है।
फसल की बर्बादी से असमय काल के गाल में समाए किसानों के आश्रितों को मुआवजा और परिवार के किसी एक सदस्य को सरकारी नौकरी दिए जाने की मांग भी उठाई गई। इस दौरान केंद्र सरकार की ओर से घोषित गेहूं के समर्थन मूल्य पर प्रदेश सरकार की ओर से पांच सौ रुपये बोनस दिए जाने की भी मांग की गई है। धरना सभा में प्रदेश महासचिव अशोक यादव, प्रदीप तिवारी, शिव प्रकाश विश्वकर्मा, अजय गिरि, विनय कुमार मौजूद थे।