इसी दौरान पता चला कि नौ और परीक्षक फरार हो गए। इसमें अशोक कुमार, वीरेंद्र कुमार, सतीश, अगस्त, आशीष कुमार, जीतबहादुर ,मनीष कुमार, आलोक, तारकेश शामिल हैं। आरोपी सुभाष ने बताया कि ये सभी मई की शुरुआत से यहां शिक्षाशास्त्र, समाजशास्त्र, गृहविज्ञान, वनस्पति विज्ञान , भूगोल की कॉपियों का मूल्यांकन कर चुके हैं।
परीक्षा नियंत्रक व्यास नारायण सिंह ने कहा कि फर्जी परीक्षक पकड़े जाने का मामला संज्ञान में आया है। कॉपियों का मूल्यांकन दुबारा कराया जाएगा। आरोपी को पुलिस को सौंप दिया गया है। उसका रिकार्ड जुटाया जा रहा है।
मूल्यांकन केंद्र पर एक दर्जन फर्जी परीक्षक दर्जनों विषयों का मूल्यांकन कर चुके हैं। एक गिरोह है जो मूल्यांकन केंद्रों पर संबंधित परीक्षकों के जरिए फर्जी आईडी के दम पर दाखिल होता है। विश्वविद्यालयों में भूगोल, गृह विज्ञान, शिक्षाशास्त्र, हिंदी, वनस्पति विज्ञान, जंतु विज्ञान समेत एक दर्जन विषयों का मूल्यांकन कर चुके।
जिससे यह हजारों छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर चुके हैं। यह गिरोह फैजाबाद , गोरखपुर , सिद्धार्थ नगर, काशी विद्यापीठ समेत कई विवि में फर्जी प्रमाण पत्रों के साथ मूल्यांकन कार्य किया है। पकड़ने पर मूल्यांकन का 10 प्रतिशत भुगतान करके मामला रफादफा कर देते हैं।