जौनपुर। कस्तूरबा गांधी और परिषदीय विद्यालयों में शिक्षक भर्ती में हुए फर्जीवाड़े का आए दिन हो रहे खुलासे के चलते बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने चुप्पी साध ली है। दफ्तर के मुख्य गेट पर सुरक्षा कड़ी कर दी गई है।
अब बीएसए कार्यालय में अफसर ही नहीं कर्मचारियों से भी मिलना आसान नहीं है। मुख्य गेट पर जंजीर लगाकर वहां चौकीदार को बैठा दिया गया है। कार्यालय में किसी से मिलने के लिए गेट के बाहर से ही अपना नाम, पता और अधिकारी से मिलने का कारण आदि का उल्लेख करते हुए पर्ची भेजनी पड़ रही है। संबंधित अधिकारी या पटल सहायक से अनुमति मिलने के बाद ही गेट के भीतर प्रवेश दिया जा रहा है। पिछले दिनों आर्थिक अपराध शाखा की टीम के छापामारी के बाद फाइल गुम होने आदि की बात सामने आने के बाद विभाग सजग हो गया है। बताते हैं कि सभी पटल सहायकों को हिदायत दी गई है कि किसी से वे दफ्तर के भीतर की सूचना का साझा न करें।
दरअसल कस्तूरबागांधी आवासीय बालिका विद्यालय में फर्जी दस्तावेज के सहारे शिक्षिकाओं की नियुक्ति का खुलासा, परिषदीय विद्यालयों में अंतरजनपदीय तबादले के सहारे नियुक्त फर्जी शिक्षकों की फाइल कार्यालय से गायब होने और शिक्षकों के पैन कार्ड में खामी मिलने की खबरों से विभाग की लगातार किरकिरी हो रही है।
फर्जीवाड़े के खुलासे के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई
जौनपुर। कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय मुफ्तीगंज की पूर्णकालिक शिक्षिका प्रीति यादव की फर्जी नियुक्ति के खुलासे के बाद बक्शा में तैनात शिक्षिका गरिमा सिंह के दस्तावेज भी फर्जी पाए गए हैं।
दस्तावेजों के आनलाइन जांच में पता चला है कि गरिमा इंटरमीडिएट की परीक्षा में फेल है। बावजूद इन्हें फर्ज दस्तावेज के सहारे शिक्षक बन गई। इस बात का खुलासा होने के तीन दिन बाद भी विभाग की ओर से उस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। हालांकि गरिमा के पिता ने बीएसए को प्रार्थनापत्र देकर कहा है कि उनकी बेटी ने जिस वर्ष इंटर की परीक्षा दी थी उस वर्ष अंग्रेजी विषय की कापियां जल गई थी। रिजल्ट घोषित होने के बाद आदेश हुआ कि जिन परीक्षार्थियों की कापियां जल गई हैं उन्हें जनरल मार्किंग कर पास कर दिया जाए। उसका अंकपत्र तो बोर्ड ने आफलाइन जारी कर दिया पर उस डाटा परिवर्तन को आनलाइन अपडेट नहीं किया गया। इसे साबित करने के लिए उन्होंने बीएसए से समय मांगा है।
डीसी ईएमआईएस पर भी कार्रवाई से कतरा रहा विभाग
अनामिका शुक्ला और प्रीति यादव का दस्तावेज इसी कर्यालय से जालसाजों को सौंपने के खुलासे के बाद एसटीएफ ने भले ही यहां के डीसी ईएमआईएस आनंद सिंह को गिरफ्तार कर लिया है। हालांकि स्थानीय स्तर पर उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है। इलाहाबाद में अनामिका के नाम पर नौकरी करने वाली फर्जी शिक्षिका के खुलासे के बाद वहां की पुलिस जौनपुर के डीसी ईएमआईएस आनंद सिंह के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की तैयारी कर रही है। दूसरे जिलों में भी आनंद पर कार्रवाई हुई है पर जिस कार्यालय से दस्तावेज जालसाजों को सौंपे गए उसी कार्यालय के जिम्मेदार उसपर कार्रवाई से बच रहे हैं।