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यूपी: जौनपुर में पुलिस के हत्थे चढ़ा फर्जी आईएएस अधिकारी, खुद को एसीएस होम का बताता था रिश्तेदार, ऐसे खुली पोल

Thu, 03 Feb 2022 02:02 PM IST
उत्पल कांत अमर उजाला नेटवर्क, जौनपुर

सार

जौनपुर पुलिस ने फर्जी आईएएस अधिकारी की लाल नीली बत्ती लगी गाड़ी को बरामद किया है। इस दौरान पुलिस ने अभियुक्त के पास से लैपटॉप,आईपैड और तीन मोबाइल फोन भी बरामद किए हैं।
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पुलिस के हत्थे चढ़ा फर्जी आईएएस अधिकारी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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यूपी के जौनपुर में फर्जी आईएएस अधिकारी पुलिस के हत्थे चढ़ा है। वह खुद को एसीएस होम का रिश्तेदार बता कर अधिकारियों पर दबाव बनाता था। पुलिस ने उसके पास से लखनऊ के एक इंजीनियर के नाम से दर्ज लाल-नीली बत्ती लगी कार के साथ ही लैपटॉप,आईपैड और तीन मोबाइल फोन भी बरामद किए हैं।  

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एसपी सिटी  डा. संजय कुमार ने बताया कि शहर कोतवाली पुलिस, एसओजी व सर्विलांस टीम द्वारा बुधवार की रात रसूलाबाद तिराहे पर संदिग्ध व्यक्तियों और वाहनों की चेकिंग कर रही थी। इसी दौरान चौकिया धाम की तरफ से आ रही लाल-नीली बत्ती लगी एस-क्रॉस गाड़ी नंबर यूपी-32-बीजी-6626 को रोका गया।

वाहन चालक ने स्वयं को एसीएस होम का रिश्तेदार बताते हुए पुलिस को अपने प्रभाव मे लेना चाहा। उक्त व्यक्ति का व्यवहार संदिग्ध लगा। शक होने पर पुलिस ने ई-चालान एप के माध्यम से गाड़ी के नंबर को चेक किया तो उसकी कलई खुल गई।

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कार में लगा रखा था फर्जी नंबर प्लेट

आरोपी के पास से बरामद कार - फोटो : अमर उजाला
कार के रजिस्ट्रेशन पेपर पर मालिक का नाम एग्जीक्यूटिव इंजीनियर लखनऊ डिवीजन, शारदा कैनाल प्रदर्शित हुआ। साथ ही कार स्विफ्ट डिजायर होना अंकित पाया गया। इसके बाद पुलिस ने वाहन के कागजात मांगे तो वह कतराने लगा। जिसपर पुलिस ने सख्ती से पूछताछ की तो युवक ने अपना नाम हिमाशु कन्नौजिया पुत्र गुलाब कन्नौजिया निवासी भेटावर थाना सरायख्वाजा जिला जौनपुर बताया। 

फन कॉल एप से ऐसे करता था काम

एएसपी सिटी के मुताबिक पूछताछ के दौरान गिरफ्तार हिमांशु कन्नौजिया ने बताया कि खुद को प्रशासनिक अधिकारी बताने के लिए कार में कूटरचित सरकारी नम्बर प्लेट लगाया है। लैपटॉप, आईपैड और मोबाइल फोन के बारे मे पूछने पर बताया कि अपने मोबाइल में फन कॉल एप के जरिए एसीएस होम के नंबर से प्रशासनिक अधिकारियों के सीयूजी नंबर पर कॉल करता था।
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सचिवालय में नौकरी लगवाने के नाम पर करता था उगाही

सामने वाले अधिकारी को वह खुद को एसीएस होम बताता था, फिर जायज-नाजायज काम करवाने के लिए दबाव बनाता था। इसी एप के माध्यम से वह विभिन्न पुलिस अधिकारियों व अन्य लोगों को कॉल करके उनके संबंधितों की सचिवालय में नौकरी लगवाने के नाम पर पैसे लेता था। 
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