गोमती नदी किनारे किया गया अतिक्रमण। अमर उजाला
पांच नदियों और 20 हजार तालाब पोखरे अतिक्रमण की मार से कराह रहे हैं। ज्यादातर तालाबों पर कब्जा हो गया है। कब्जे की वजह से नदियों का दायरा भी सिमटता जा रहा है। और तो और शहर की ऐतिहासिक झील का अस्तित्व भी कहीं नहीं दिखता। झील वाले इलाके में इमारतें खड़ी हो गई हैं।
जिले में गोमती, सई, पीली, बसुई और वरुणा नदियां हैं।
सभी नदियां अतिक्रमण की मार से कराह रही हैं। शिकायतों के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हो पाती। कहने के लिए तो जिले में 20 हजार से अधिक तालाबों की संख्या है। लेकिन प्रशासन की लापरवाही से इन तालाबों पर भी लगातार कब्जा होता जा रहा है।
1995 में जिले में 40 सरकारी जलाशयों का रकबा 384.95 हेक्टेयर था जो अब सिमट कर 171.68 हेक्टेयर ही रह गया है। यानी 20 सालों मे जलाशय की 213.27 हेक्टेयर भूमि पर कब्जा कर लिया गया। हालात यह है कि बदलापुर क्षेत्र में एक तालाब को पाटकर कई एकड़ में खेत बना लिया गया था। जिसे एडीएम बदलापुर ने खाली कराकर उसे तालाब का स्वरूप दिलवाया। यह आंकड़े सिर्फ बानगी भर हैं।
एक कैबिनेट मंत्री पर भी तालाब और भीटा पाटकर उसका अस्तित्व मिटाने का आरोप पिछले दिनों चर्चा में रहा। शहर में तो कहीं तालाब दिखते ही नहीं हैं। कहने को जो झील एरिया है उसका अस्तित्व मिट चुका है।