जौनपुर। ठंड में कुत्तों का आतंक बढ़ गया है। इनके उग्र व्यवहार से राहगीर दहशत में रहते हैं। खासकर बच्चे और बूढ़ों की ज्यादा मुसीबत हो जाती है। पिछले एक सप्ताह 1751 मामले सामने आए हैं। इसमें 25 जनवरी को 199, 26 को 216, 27 को 488, 28 को 158, 29 को 210, 30 को 316 और 31 जनवरी को 164 लोगों को कुत्तों ने काटकर घायल किया। आंकड़ों के मुताबिक एक साल में 50965 लोगों को कुत्तों ने काटकर घायल कर दिया।
जिला अस्पताल के अलावा अन्य स्वास्थ्य केंद्रों पर एंटी रेबीज का इंजेक्शन लगवाने के लिए रोजाना बड़ी संख्या में लोग जुट रहे हैं। कुत्तों के काटने के लगातार बढ़ते मामलों को देखते हुए चिकित्सकों ने इंजेक्शनों का कोटा बढ़वा दिया है। शहर से लेकर गांव तक सड़क पर जगह-जगह आवारा कुत्तों का जमावड़ा रहता है। इनका आतंक इतना है कि काटना तो छोड़िए इनके दौड़ाने से एक्सीडेंट भी हो रहे हैं। वहीं, इनसे संबंधित दो जिम्मेदार विभाग नगर पालिका और पशुपालन विभाग ने चुप्पी साध रखी है। मंगलवार को 316 और बुधवार को भी 164 लोगों ने एंटी रैबीज का इंजेक्शन लगवाया। बीते शनिवार को तो सर्वाधिक 488 लोगों को इंजेक्शन लगाया गया था।
पूर्व में भी हो चुकी हैं कई घटनाएं
कुत्तों का आतंक पहले भी रहा है। लखनऊ और वाराणसी में तो कुछ दिन पहले कुत्ते ने एक व्यक्ति और एक बच्चे को नोंच कर मार डाला था। ऐसी घटनाओं से सीख लेने के बजाय नगर पालिका और पशुपालन विभाग लापरवाही बरत रहा है।
नहीं चलाया अभियान
कुत्तों के आतंक को कम करने या आम लोगों को इनसे बचाने के लिए विभागों की ओर से कोई कदम नहीं उठाए गए। पशुपालन विभाग ने तो बीते एक साल से कोई अभियान नहीं चलाया है। न तो कुत्तों को पकड़ा और न ही उनकी नसबंदी ही कराई।
एक साल में लगा इतने लोगों को लगा एंटी रेबीज
महीना - संख्या
जनवरी - 6365
फरवरी - 3140
मार्च - 4448
अप्रैल - 3948
मई - 3776
जून - 3492
जुलाई - 3104
अगस्त - 3524
सितंबर - 4456
अक्तूबर - 6052
नवंबर - 1792
दिसंबर - 3377
वर्जन
कुत्तों के पकड़ने की व्यवस्था महानगरों में है। नगर पालिका प्रशासन अभियान चलाए तो पशु चिकित्सा विभाग सहयोग कर सकता है। अकेले पशुपालन विभाग कुछ नहीं कर सकता। - डाॅ. परमहंस राय, मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी, जौनपुर
31जेएनडी04: खटकड़ टोल प्लाजा पर धरने पर बैठे ड्राइवर और अन्य संगठन पदाधिकारी। संवाद