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इंसास और एसएलआर से लैस हुई जिले की पुलिस .

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जौनपुर। पुलिसकर्मियों के हाथ में अब थ्री नॉट थ्री रायफल नहीं दिखेगी। वे इंसास और एसएलआर जैसे आधुनिक असलहों से लैस होंगे। पुलिस आधुनिकीकरण योजना के तहत जिले की पुलिस को हाल ही में 407 इंसास और 62 एसएलआर रायफलें मिली हैं। इसे सभी थानों में पहुंचा दिया गया हैं। वहीं 795 पुरानी थ्री नॉट थ्री रायफलों को मालखाने में रखवा दिया गया है। इनका इस्तेमाल ट्रेनिंग में होगा।
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पुलिस विभाग में दशकों से थ्री नॉट थ्री रायफल ही चलन में रहा है। अत्याधुनिक असलहों से लैस बदमाशों का सामना करने के लिए पुलिसकर्मियों को यही बंदूक थमाई जाती रही है। इसे खोलने-बंद करने और कारतूस लगाने की लंबी प्रक्रिया के बीच पुलिसकर्मियों के उलझने का लाभ लेकर बदमाश वारदात को अंजाम देकर फरार हो चुके होते हैं। पुलिस को आधुनिक बनाने की दिशा में चल रही कवायद के तहत दशकों से प्रचलित थ्री नॉट थ्री रायफल को अब महकमे से विदा कर दिया गया है। पुलिस के पास अभी तक पिस्टल, थ्री नॉट थ्री राइफल और एके 47 थीं। अब थानों में किसी भी पुलिसकर्मी के हाथ में पुरानी थ्री नॉट थ्री रायफल नहीं रहेगी। उन्हें आधुनिक इंसास और एसएलआर जैसे असलहे मुहैया कराए गए हैं। नगर कोतवाल पवन उपाध्याय का कहना है कि सुरक्षा की दृष्टि से इंसास सबसे मजबूत हथियार है।
थानों में दी गई इंसास रायफल
एसपी सिटी डॉ.अनिल पांडेय ने बताया कि नगर कोतवाली को 16, बदलापुर को 15, बक्शा को 10 और बाकी थानों को 10 से 12 की संख्या में इंसास रायफलें दी गई हैं। इसके अलावा कुल 62 एसएलआर रायफल भी आई है। इसमें से 51 का वितरण थानों को कर दिया गया है। लाइनबाजार और कोतवाली को पांच-पांच, बक्शा को 10, मछलीशहर को 12, रामपुर को 4, गोराबादशाहपुर को 4, सुरेरी, खेतासराय, सिंगरामऊ, पवारा को दो-दो समेत अन्य थानों को भी एसएलआर रायफल दी गई है।
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क्या खास है इंसास में
1998 की गणतंत्र दिवस परेड में पहली बार भारत में बनी अत्याधुनिक इंसास राइफल्स प्रदर्शित की गई थी। इसका पहली बार प्रयोग 1999 में कारगिल युद्ध के दौरान सेना ने किया था। अब इंसास को पैरामिलिट्री फोर्स और पुलिस को दिया गया है। इसमें दूरबीन लगाई जा सकती है। 4.15 किलोग्राम वजन की इंसास में 5.56 एमएम की कारतूस इस्तेमाल होती है। आगे एक चाकू भी जोड़ा जा सकता है। 400 मीटर की रेंज वाली इंसास का विकसित रूप लाइट मशीन गन (एलएमजी) है। इसकी रेंज 700 मीटर है और ऑटोमेटिक मोड पर भी फायर किया जा सकता है। इसमें 20 से 30 राउंड की मैग्जीन का प्रयोग किया जाता है। यह राइफल एक मिनट में 650 फायर कर सकती है।
सुरक्षा की दृष्टि से सभी थानों में इंसास दी गई हैं। थानों में थ्री नॉट थ्री राइफल रखवा दी गईं हैं। पुरानी रायफलों को पुलिसलाइन में ट्रेनिंग के काम में लिया जाएगा। इससे लैस पुलिसकर्मी को रात्रि ड्यूटी पर भी अलर्ट रहने के निर्देश दिए गए हैं। -डॉ.अनिल पांडेय, एसपी सिटी।
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