छठ पूजा तो संपन्न हो गई लेकिन नदियों और तालाबों के पास गंदगी का अंबार लग गया। त्योहार से पहले नदियों के घाटों पर तमाम स्वयं सेवी संगठनों ने भी साफ सफाई के प्रति चिंता जताई लेकिन बाद में किसी को इसकी सुधि नहीं रही।
छठ के मौके पर नदियों और तालाबों के किनारे जहां पूजा पाठ के लिए व्रती महिलाओं की भीड़ जुटी वहां अब फूल, माला, पालिथीन, लकड़ी, गन्ने आदि के अवशेष से गंदगी का अंबार लग गया है।
छठ पूजा संपन्न होने के बाद अमर उजाला ने मंगलवार को नदियों के उन घाटों और तालाबों की पड़ताल की जहां पूजा के लिए मेला लगा था। वहां चारो तरफ गंदगी का अंबार लगा हुआ है। खास बात यह कि स्वच्छ भारत मिशन की शुरुआत नदियों के घाटों की सफाई से ही हुई थी। जहां से इतने बड़े मिशन की शुरुआत हुई वहीं पर ऐसे हालात पैदा हो गए हैं।
छठ पूजा से पहले कई स्वयं सेवी संगठनों ने भी इस बात की चिंता जताई थी कि पूजा स्थलों पर साफ सफाई का अभाव है। पर्व खत्म होते ही घाटों की सफाई की चिंता समाप्त हो गई। गोमती नदी के विसर्जन घाट, गोपी घाट, हनुमान घाट पर दूर से ही फूल माला, पालिथीन, गन्ने आदि का अवशेष दिखाई दे रहा। यह गंदगी धीरे धीरे नदी में जा रही है और पानी को प्रदूषित कर रही है।
नदियों और तालाबों के मौजूदा हालात हमारी आस्था पर भी सवाल खड़े कर रहे हैं। नदियां और तालाब, कुंड, सरोवर हमारी आस्था से जुड़े हैं तो इनकी साफ सफाई की चिंता भी हमे ही होनी चाहिए। केराकत प्रतिनिधि के अनुसार तहसील के जिन तालाबों के किनारे छठ पूजा के मौके पर मेला लगा था वहां अब तालाब किनारे गंदगी का अंबार लगा हुआ है।