साहित्य वाचस्पति डॉ.श्रीपाल सिंह क्षेम की जयंती पर कवि सम्मेलन में कविता करते कवि बुद्धिनाथ मिश
जौनपुर। साहित्य वाचस्पति डॉ.श्रीपाल सिंह क्षेम की 103 वीं जयंती मंगलवार की रात्रि नगर के वाजिदपुर तिराहे स्थित एक होटल में कवि सम्मेलन के रूप में मनाई गई। इस दौरान एक से बढ़कर एक कवियों ने गीत और गजल की शानदार प्रस्तुति दी। गीतों की दुनिया में अपनी विशिष्ट पहचान रखने वाले गीतकार डॉ बुद्धिनाथ मिश्र ने जरूरत क्या तुम्हारे रूप को शृंगार करने की, किसी हिरनी ने अपनी आंख में काजल लगाया क्या कभी? के अलावा एक बार जाल और फेक रे मछेरे जाने किस मछली में बंधन की चाह हो। जैसे गीतों से श्रोताओं को भाव विभोर कर दिया।
आजमगढ़ से आईं कवयित्री आराधना शुक्ला ने तुम गेसू संवारा करो मैं दुप्पटे का कोना चबाती रहूं। तुम खामोशियां गुनगुनाते रहो मैं तरन्नुम भरा गीत गाती रहूं। पंक्तियों के माध्यम से शृंगार रस की छटा बिखरी। ओज के कवि अतुल वाजपेई ने सर्वोच्च रहेगा कीर्ति केतु मैं सवा अरब की ताकत हूं। मैं भारत हूं। मैं भारत हूं। जैसी कविताओं से देशभक्ति की भावना का संचार किया। हास्य व्यंग के सशक्त हस्ताक्षर सर्वेश अस्थाना ने किसी नेता से गिरगिट की तुलना करना महापाप है क्योंकि रंग बदलने के मामले में नेता गिरगिट का भी बाप है। जैसी कविताओं से लोगों को ठहाके लगाने के लिए बाध्य कर दिया।
जिलाधिकारी डॉ दिनेशचंद्र ने भी समस्त कवियों को अंग वस्त्रम देकर सम्मानित किया। मुख्य अतिथि राज्यसभा सदस्य सीमा द्विवेदी ने कहा कि साहित्य की जब चर्चा होती है साहित्य वाचस्पति डॉ श्रीपाल सिंह क्षेम का नाम आदर के साथ लिया जाता है। उनके भाई सुधाकर उपाध्याय ने डॉ क्षेम के व्यक्तित्व की चर्चा करते हुए बताया था कि क्षेम कुशल अध्यापक थे जो छात्रों को अपने घर बुलाकर भी पढ़ाते थे। इस मौके पर पंडित रामकृष्ण त्रिपाठी, रामदयाल द्विवेदी, पूर्व प्राचार्य डॉ समर बहादुर सिंह, डॉ प्रमोद कुमार सिंह, प्रबंधक राजीव सिंह, अधिवक्ता वीरेंद्र सिंह, पूर्व विधायक सुरेंद्र सिंह आदि मौजूद रहे। संचालन डॉ मधुकर तिवारी ने किया। आभार पुत्र शशि मोहन सिंह क्षेम ने व्यक्त किया।
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स्वतंत्रता आंदोलन के समय छायावादी कविता का आविर्भाव : डीएम
विशिष्ट अतिथि जिलाधिकारी डॉ दिनेश चंद्र ने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन के समय छायावादी कविता का आविर्भाव हुआ। उन्होंने कहा कि साहित्यकार के नहीं रहने पर उसकी रचनाएं समाज में उसे जीवित रखने का काम करती हैं। विशिष्ट अतिथि एसपी डॉ कौस्तुभ ने साहित्य की आवश्यकता पर बल दिया। समारोह की अध्यक्षता कर रहे लोक सेवा आयोग के पूर्व सदस्य प्रोफेसर आरएन त्रिपाठी ने कहा कि डॉ क्षेम की कविता पांव में हो थकान, अश्रु भीगे नयन, राह सूनी मगर गुनगुनाते चलो का उद्धरण देते हुए कहा कि डॉ क्षेम अपनी रचनाओं के माध्यम से आज भी लोगों के हृदय में विद्यमान हैं।