जिला अस्पताल में बच्चे की मौत के बाद एम्बुलेंस न मिलने के चलते ठेले बच्चे के शव व पत्नी को बैठाकर ल
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जौनपुर। जिला अस्पताल में मरीजों को सुविधा देने के नाम पर काफी पहले से खेल चल रहा है। अब शव पहुंचाने नाम पर भी विभाग के अधिकारी खेल करना शुरू कर दिए हैं। वाहन चालकों को शव पहुंचाने के लिए मिलने वाला डीजल भी बंद कर दिया गया है। वाहन चालकों को धमकी दी जाती है कि यदि 10 किलोमीटर से अधिक दूर शव पहुंचाने जाओगे तो तेल का पैसा तुम्हारे वेतन से काट लिया जाएगा। इसे लेकर शव वाहन चालकों में काफी नाराजगी है।
जिला अस्पताल में इलाज के दौरान मौत होने पर शव को घर तक पहुंचाने की व्यवस्था है। इसके जिला अस्पताल में दो शव वाहन चालकों की नियुक्ति की गई है। वाहन चालकों का कहना है कि शव पहुंचाने के लिए अप्रैल तक उन्हें सीएमएस की अनुमति पर पंचहटिया स्थित एक पेट्रोल पंप से डीजल मिलता था। इसे मई से बंद कर दिया गया है। शव वाहन चालकों का कहना है कि जब वह डीजल लेने के लिए पेट्रोल पंप पर गए तो डीजल देने से उन्हें मना कर दिया गया। पंप के मैनेजर मनोज का कहना है कि पिछले बकाया भुगतान होने के बाद ही डीजल दिया जाएगा। इसकी सूचना मुख्य चिकित्सा अधीक्षक को दी गई लेकिन अभी तक कोई जवाब नहीं मिला। इसके पहले ट्रामा सेंटर हौज में तैनात थे तो वहां डीजल का पैसा मिलता था। जिला अस्पताल के शव वाहन चालक हरिशंकर यादव और अमीर अहमद का आरोप है कि सीएमएस केवल 10 किलोमीटर तक शव पहुंचाने की अनुमति देते हैं। कहते हैं कि दस किलोमीटर से अधिक दूर शव पहुंचाने गए तो तुम्हारे वेतन से शेष डीजल का पैसा काट लिया जाएगा। चालकों का यह भी आरोप है कि उन्हें 10 हजार रुपये मासिक वेतन पर रखा गया है लेकिन वेतन के नाम पर केवल सात हजार रुपये ही दिया जाता है। शेष तीन हजार रुपये टीडीएस के नाम पर कटौती करना बताया जाता है। कई बार पत्र लिखा गया लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
ठेले से शव लेकर रोते हुए घर गए बच्चे के माता-पिता
जौनपुर। शहर के लाइन बाजार थाना क्षेत्र के मतापुर निवासी सुरेश पटेल और उनकी पत्नी नीतू पटेल अपने चार माह के बच्चे का इलाज कराने के लिए जिला अस्पताल आए थे। बच्चे की अस्पताल में मौत हो गई। शव को घर पहुंचाने के लिए कोई साधन अस्पताल की तरफ से नहीं मुहैया कराया गया। आर्थिक स्थिति ठीक न होने के कारण गरीब दंपति बच्चे के शव को ठेला से लेकर रोते हुए घर चले गए। पूछने पर बताया कि उन्हें अस्पताल से कोई वाहन नहीं दिया गया।
अपने खुद के ठेले से परिजन बच्चे को लेकर आए थे। वह मर चुका था। इसके बाद वह ठेले से ही लेकर चले गए। वह नजदीक के ही थे। रही बात शव ले जाने को लेकर किलोमीटर की तो मेरे स्तर से कभी ऐसा नहीं कहा गया है। न ही इस तरह की किसी ने मुझसे शिकायत की है। यदि कोई झूठा आरोप लगाएगा तो मैं उसके खिलाफ कार्रवाई के लिए डीएम को पत्र लिखूंगा। - डा. एके शर्मा सीएमएस