सिकरारा थाना क्षेत्र के बढ़ौली अहिरान गांव में बाइक की मांग को लेकर छह वर्ष पूर्व विवाहिता सरिता की हत्या के मामले में आरोपी पति कमलेश यादव को दोषी करार देते हुए बुधवार को फास्ट ट्रैक कोर्ट प्रथम के जज एमपी सिंह ने खुले न्यायालय में आजीवन कारावास एवं दस हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है।
जबकि आरोपी सास, ससुर व ननद को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया गया। अभियोजन कथानक के अनुसार जलालपुर थाना क्षेत्र के ताला मझवारा निवासी श्रीधर यादव ने सिकरारा थाने में इस आशय की रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उसने अपनी बहन सरिता की शादी सात जून 2006 को बढ़ौली अहिरान गांव निवासी कमलेश यादव पुत्र यदुनाथ उर्फ तीरथ के
साथ किया था। हैसियत के मुताबिक दान दहेज दिया था। बहन विदा होकर ससुराल गई तो उसके ससुरालीजन पति कमलेश यादव, ससुर यदुनाथ उर्फ तीरथ यादव, सास दुर्गावती देवी व ननद गिरीजा बाइक कीे मांग को लेकर बहन को प्रताड़ित करने लगे। उक्त मांग पूरी नहीं होने पर 10 सितंबर 2010 को गला दबाकर मेरी बहन की हत्या कर दिए।
पुलिस ने मामले की विवेचना पूरी कर आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया। अभियोजन पक्ष से सहायक शासकीय अधिवक्ता अरशद बहाव ने कुल छह गवाह कोर्ट में परिक्षीत कराया। न्यायाधीश ने दोनों पक्षों की बहस व तर्को को सुनने और पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों के परिसीलन के बाद आरोपी पति कमलेश यादव को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास और 10 हजार रुपया अर्थदंड की सजा सुनाई है। जबकि आरोपी सास, ससुर व ननद को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया गया।