शाहगंज थाना क्षेत्र में चार वर्ष पूर्व सबरहद गांव में बाइक और धन की मांग को लेकर पत्नी को प्रताड़ित कर आत्महत्या के लिए उत्प्रेरित करने के मामले में बुधवार को फास्ट ट्रैक कोर्ट प्रथम के जज एमपी सिंह ने सजा सुनाई।
जज ने आरोपी पति कृष्णा राजभर को दोषी करार देते हुए खुले न्यायालय में सात वर्ष का सश्रम कारावास एवं छह हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। जबकि सास व ससुर को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया।
अभियोजन कथानक के अनुसार आजमगढ़ जनपद के सरायमीर थाना क्षेत्र के रंगडीह निवासी बिमला देवी पत्नी रामफेर ने शाहगंज थाने में इस आशय की रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि पुत्री साधना की शादी लगभग 20 वर्ष पूर्व शाहगंज थाना क्षेत्र के सबरहद(उजरौटी)निवासी कृष्णा राजभर पुत्र प्यारेलाल के साथ किया।
पुत्री विदा होकर ससुराल गई तो पति कृष्णा राजभर, ससुर प्यारेलाल व सास शारदा देवी मोटर साइकिल व धन की मांग को लेकर उसे मारने पीटने और प्रताड़ित करने लगे। उक्त मांग पूरी नहीं होने पर दो नवंबर 2012 की बीती रात सास, ससुर अपने पुत्र कृष्णा की साजिशन धारदार हथियार से पुत्री के सर में मारकर हत्या कर दिए।
साथ ही पुत्री के शव को सिधाई रेलवे क्रासिंग के पास पटरी पर फेंक दिया। गांव वालोें की सूचना पर मै और मेरे परिवार के लोग मौके पर पहुंचे। पुलिस ने मामले की विवेचना पूरी कर आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया। अभियोजन पक्ष से सहायक शासकीय अधिवक्ता अरशद बहाव ने कुल छह गवाह कोर्ट में परिक्षित कराया।
न्यायाधीश ने दोनों पक्षों की बहस व तर्को को सुनने एवं पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों के परिसिलन के बाद आरोपी पति कृष्णा राजभर को दोषी करार देते हुए खुले न्यायालय में सात वर्ष का सश्रम कारावास एवं छह हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। जबकि संदेह का लाभ पाते हुए सास व ससुर को बरी हो गए।