सराय ख्वाजा थाना क्षेत्र में दहेज हत्या के मामले में कोर्ट में वादी मुकदमा अपने बयान से मुकर गया। इस पर एडीजे पंचम सुनील कुमार सिंह द्वितीय ने शुक्रवार को संदेह का लाभ देते हुए आरोपियों को बरी कर दिया। साथ ही न्यायालय में झूठी गवाही देने पर वादी मुकदमा के विरुद्ध प्रकीर्णवाद दर्ज करते हुए नोटिस जारी किया है।
खेतासराय थाना क्षेत्र के रुधौली गांव निवासी लालता प्रसाद पुत्र शिवहरख ने सरायख्वाजा थाने में रिपोर्ट दर्ज कराया था कि उसकी पुत्री गुड्डी की शादी 2008 में धौरइल निवासी लालबहादुर यादव पुत्र रघू यादव के साथ हुई थी। पुत्री विदा होकर ससुराल गई तो पति लालबहादुर, ससुर रघू, सास चौता देवी व देवर परविंदर दहेज की मांग को लेकर प्रताड़ित करने लगे।
मांग पूरी नहीं होने पर 10 नवंबर 2011 की सुबह पुत्री गुड़िया व उसकी चार माह की लड़की को जलाकर मार डाले। इसके पूर्व भी आरोपी की शादी हुई थी। उसे भी जलाकर मार डाले थे। पुलिस ने मामले की विवेचना पूरी कर आरोप पत्र कोर्ट में दाखिल किया। गवाही के समय वादी मुकदमा लालता प्रसाद अपने बयान से मुकर गया। जिससे संदेह का लाभ देते हुए आरोपी बरी कर दिए गए। जबकि झूठी गवाही देने पर वादी मुकदमा लालता प्रसाद के खिलाफ प्रकीर्णवाद दर्ज करते हुए नोटिस जारी किया है।
अभियोजन पक्ष से पैरवी सहायक शासकीय अधिवक्ता लक्ष्मीशंकर यादव ने किया। उधर, शाहगंज जीआरपी थाना क्षेत्र में वर्ष 1995 में हुए तीहरे हत्याकांड का मामला शुक्रवार को एडीजे पंचम सुनील कुमार सिंह द्वितीय की अदालत में पेश हुआ। जिसमें आरोपी हाजिर अदालत नहीं आए। साथ ही गवाह भी नहीं पेश हुए। जिससे मामले में कोई कार्यवाही नहीं हो सकी। न्यायाधीश ने मामले में अगली सुनवाई के लिए 13 अप्रैल की तिथि निर्धारित की है।
बता दें कि पूर्व सांसद उमाकांत यादव सहित उनके सहयोगियों द्वारा अपने चालक को पुलिस लाकअप से जबरन उठा लिया गया था। इस दौरान दो सिपाही और एक अन्य की हत्या हो गई थी। इस दौरान कुछ लोग घायल भी हो गए थे और अपरातफरी का माहौल व्याप्त हो गया था। अभियोजन पक्ष से पैरवी सहायक शासकीय अधिवक्ता लक्ष्मीशंकर यादव ने किया।