जौनपुर। 1967 में पैदा हुआ मुन्ना बजरंगी पांचवीं की पढ़ाई के बाद शुरूआती दिनों में एक ईंट भट्टे पर ट्रैक्टर चलाता था। बाद में वह कालीन बुनने लगा।
1982 में उस पर लूट और हत्या का केस दर्ज हुआ था। इसके बाद 1984 में रामपुर थाना क्षेत्र के रामपुर और गोपालापुर के बीच कालीन व्यवसायी को लूट की नीयत से गोली मार दी थी। कालीन व्यवसायी की मौत के बाद वह पुलिस की निगाह में आ गया तो वाराणसी के डिप्टी मेयर अनिल सिंह के शरण में चला गया। यहां से उसके तार जौनपुर के विनोद सिंह नाटे से जुड़ गए। विनोद सिंह और माफिया गजराज सिंह कुे संरक्षण में मुन्ना ने जिला कारागार के सामने भाजपा नेता रामचंदर सिंह सहित तीन लोगों की हत्या कर सिपाही की कारबाइन लूटी और फरार हो गया।
1995 में वाराणसी के कैंट थाने में मुन्ना पर हत्या का मामला दर्ज हुआ। इसके बाद 1996 में रामपुर में मारपीट, प्राणघातक हमला, हत्या, 1996 में मंडुवाडीह में हत्या, 1997 में रामपुर में प्राणघातक हमला, उसी साल लंका में हत्या, 1996 में समयपूर्व बादली में प्राणघातक हमला, 2002 में दशाश्वमेध में हत्या, उसी साल चेतगंज में हत्या, 2005 में गाजीपुर के भांवरपुर में हत्या, 2009 में दिल्ली में साजिश का केस, 2012 में कैंट में केस सहित 28 से अधिक मुकदमे दर्ज हैं।
पुलिस की मानें तो जमालपुर में 1996 में पहली बार जिले में एके-47 तड़तड़ाईं थीं, जब टीडी कॉलेज छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष राजकुमार सिंह एवं रामपुर ब्लाक प्रमुख कैलाश दूबे, अमीन बांकेलाल तिवारी की गोली मारकर हत्या कर दी। इसके बाद मुन्ना ने वाराणसी में चार लोगों की हत्या कर दी। 2003-04 के दौरान वह मुख्तार अंसारी के संपर्क में आया। 29 नवंबर, 2005 को मुख्तार अंसारी के इशारे पर विधायक कृष्णानंद राय सहित सात लोगों की गाजीपुर में गोली मारकर हत्या कर दी गई। इस मामले में सीबीआई ने मुन्ना पर 12 लाख रुपये का इनाम घोषित किया था। मुन्ना ने जब अपराध की दुनिया में कदम रखा तो कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। प्रश्न यह है कि मुन्ना का साम्राज्य अपराध जगत में हरियाणा, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, बिहार से लेकर पूरे यूपी में था। हाल ही में धनबाद में कोल माफिया के पुत्र नीरज सिंह की हत्या में मुन्ना बजरंगी के शूटरों ने घटना को अंजाम दिया।
कौन संभालेगा कमान, चर्चाओं के दौर शुरू
बजरंगी की हत्या के बाद उसके गिरोह की कमान कौन संभालेगा, इसे लेकर चर्चाओं के बाजार गर्म हैं। पुलिस के अनुसार बजरंगी की हत्या के बाद उसकी गैंग के पंजीकृत सदस्यों में से मेराजुद्दीन गिरोह की कमान संभाल सकता है। वहीं, दूसरी ओर चर्चाएं यह भी है कि 10 वर्ष से ज्यादा समय से फरार 50 हजार रुपये का इनामी बदमाश विश्वास शर्मा उर्फ नेपाली या फिर छह वर्ष से ज्यादा समय से फरार 50 हजार का इनामी बदमाश अजीम अहमद गैंग की कमान संभाल सकता है। मुन्ना का पुत्र समीर 16 वर्ष का है, जबकि साले पुष्पजीत उर्फ पीजे और कामकाज देख रहे तारिक की भी हत्या हो चुकी है।