गौराबादशाहपुर। नीम हकीम लोगों की जिंदगी से खिलवाड़ कर रहे हैं। बिना डिग्री और बगैर पंजीकरण वाले इन झोला छापों की तमाम दुकानें ग्रामीण इलाकों में खुली हुई है। ये पहले मरीज को खुद गलत-सलत दवाएं देकर रुपये ऐंठते हैं और जब मरीज की हालत बिगड़ जाती है तो निजी चिकित्सालयों में भेज कर मोटा कमीशन उगाह लेते हैं। स्वास्थ्य महकमा इस ओर से आंखें मूंदे हुए है।
मुफ्तीगंज बाजार में मंगलवार को झोलाछाप के गलत इलाज से सर्दी-जुकाम पीड़ित युवक की जान चली गई। ग्रामीणों ने बवाल किया तो प्रशासन कथित चिकित्सक के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया। मगर रोजाना ऐेसे गलत इलाज से लोगों की जान जा रही है। मुफ्तीगंज व धर्मापुर ब्लाक में नीम हकीम की भरमार है। दो माह पूर्व भ्रष्टाचार मुक्ति मोर्चा के जिला अध्यक्ष ने मुख्य चिकित्साधिकारी से मुफ्तीगंज, धर्मापुर, तारा, गौराबादशाहपुर, बारी रोड, भुईली, गोदाम मुफ्तिगंज, धर्मापुर, बारी बाजार, पेसरा बाजार, देवकली, मुर्की, साधुनागर, बंजारेपुर व गजना आदि बाजारों में सौ से ज्यादा नीम हकीम की दुकानों में इलाज होने की शिकायत की थी। मगर स्वास्थ्य महकमे न कुछ नहीं किया। झोला छापों की निजी चिकित्सकों से सांठगांठ है। वे पहले खुद इलाज करते हैं। उपचार के दौरान जब मरीज की हालत अधिक गंभीर हो जाती है तो इन चिकित्सकों द्वारा प्राइवेट अस्पतालों में मरीजों को भेज दिया जाता है। समय नहीं पहुंचने पर मरीजों की मौत भी हो जाती है।
नियमानुसार बिना पंजीकरण के कोई क्लीनिक नहीं चलाई जा सकती है। इसके बावजूद स्वास्थ्य महकमा बिना पंजीकरण और डिग्री वालों के इलाज करते रहते हैं और स्वास्थ्य महकमा चुप रहता है। मंगलवार को हुए बवाल के बाद मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा ओपी सिंह का कहना है कि झोला