पूविवि के कुलपति प्रो. राजाराम यादव ने केंद्राध्यक्ष अजय द्विवेदी और अति गोपनीय अधीक्षक के खिलाफ अर्थदंड की कार्रवाई की है। केंद्राध्यक्ष अजय द्विवेदी को दस हजार रुपये जबकि अति गोपनीय अधीक्षक के खिलाफ पांच सौ रुपये अर्थ दंड दिया गया है। कुलपति ने यह कार्रवाई शोध प्रवेश परीक्षा की ओएमआर सीट को रखने में की गई लापरवाही के आरोप में की है। अर्थ दंड का नोटिस पहुंचते ही पूविवि के शिक्षक कर्मचारियों में हड़कंप मच गया है।
वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विवि की शोध प्रवेश परीक्षा पिछले महीने 13 अगस्त को विश्वविद्यालय के चार केंद्रों पर सम्पन्न हुई थी। परीक्षा में कुल 3904 छात्र शामिल हुए थे। प्रवेश परीक्षा के लिए इजीनियरिंग मैकेनिकल और फार्मेसी संस्थान और दुर्गा जी सिनियर सेकेंडरी विद्यालय में कराई गई थी। जिसमें ओएमआर सीट एवं परीक्षा संबंधी सामग्री के अवलोकन के लिए कुलपति प्रो. राजाराम यादव ने 15 सिंतबर को अति गोपनीय विभाग का औचक निरीक्षण किया गया था। फार्मेसी संस्थान परीक्षा केंद्र पर द्वितीय पाली में हुई परीक्षा एमएफसी (मास्टर आफ फाइनेंस कट्रोल) विषय की ओएमआर सीट का पैकेट बिना सील एवं बिना केन्द्राध्यक्ष के हस्ताक्षर के पाया गया था। कई अन्य अनियमितताएं भी पाई गई थी। कुलपति के निर्देश पर शोध प्रवेश परीक्षा के समन्वक डा. आलोक सिंह ने संबंधित कर्मचारियों से स्पष्टीकरण मांगा था। कर्मचारियों ने मानवीय भूल से बिना सील लिफाफा प्राप्त करने की बात कही थी। इस गलती के लिए कर्मचारियों ने क्षमायाचना भी की। कुलपति ने माना कि इतने महत्व पूर्ण कार्य में इस तरह की लापरवाही किसी भी दृष्टि से उचित नही है। कुलपति ने केन्द्राध्यक्ष अजय द्विवेदी को दस हजार रुपये अर्थ दंड और अति गोपनीय अधीक्षक रामआसरे राम को पाच सौ रुपया अर्थदंड का नोटिस दिया। नोटिस मिलते ही कर्मचारी और शिक्षकों में हड़कंप मच गया है। इस कार्रवाई से खफा अति अतिगोपनीय विभाग के अधीक्षक और कर्मचारियों का प्रतिनिधिमंडल प्रभारी रजिस्ट्रार डा. संजीव सिंह से मिला और विभाग के सारे कामकाज बंद कर दिए।