उच्च न्यायालय के अवकाश प्राप्त न्यायमूर्ति सभाजीत यादव ने कहाकि की संविधान का उद्देश्य समता मूलक समाज की स्थापना करना ह। इसको संविधान की प्रस्तावना में समाहित किया गया हैं। जिसमें हर नागरिक को समानता प्रदान की गई है। भारत को एक समाजवादी धर्मनिर्पेक्ष लोक तांत्रिक गण बनाना है।
वह रविवार को पीपुल्स यूनियन एंड एडवोकेट्स फ्रंट फार डेमोक्रेसी, सोशल एंड इकोनामिक जस्टिस की ओर से आयोजित भारतीय संविधान का उद्देश्य लक्ष्य तथा संसदीय लोकतंत्र की चुनौतियां विषयक सेमिनार में बोल रहे थे। उन्होंने कहाकि आज भी संपत्ति का पचास फीसदी हिस्सा 10 प्रतिशत लोगों के हाथ में कै द है।
गरीबी रेखा का मानदंड घटाने के बाद भी 37 फीसदी लोग गरीबी रेखा के नीचे जी रहे हैं। 2008 से 2015 तक सरकारी बैंकों का पांच लाख बासठ हजार करोड़ का कर्ज उद्योग पतियों का कर्ज माफ किया गया है। प्रदेश में 50 लाख से अधिक शिक्षित बेरोजगार हैं। समाजवाद के बजाय देश पूंजीवाद की तरफ बढ़ रहा है।
दोहरी शिक्षा प्रणाली, शिक्षा का व्यवसायी कारण से आर्थिक और सामाजिक विषमता पैदा हो गई है। व्यवस्था परिवर्तन के लिए सत्ता परिवर्तन होता है। लेकिन सत्ता परिवर्तन से ही समस्या का समाधान नही होता है। व्यवस्था परिवर्तन के लिए सभी को आगे आना होना। ग्राम पंचायत से लेकर बड़ी पंचायत तक बाहुबलियों का दबदबा है।
आम आदमी चुनावी प्रक्रिया से बाहर होता जा रहा है। मीडिया भी आज निष्पक्ष नही रह गई है। इससे लोकतंत्र को खतरा बढ़ता जा रहा है। इनके अलावा इलाहाबाद विश्वविद्यालय डा. मुश्ताक अली, डा. उमाकांत यादव, श्रीरामयादव, प्रो. एसपी तिवारी, डा. मनराज यादव, एमएकदीर, पीसी सिंह, प्रभाकर सिंह, आरके यादव, श्याम सिंह, डा. लालरत्नाकर यादव, एएसपी अवधेस कुमार यादव ने विचार व्यक्त किया। अध्यक्षता प्रेम प्रकाश यादव ने की। संचालन राजेश गुप्त ने किया। संयोजक रवींद्र नाथ यादव आभार जताया।