क्षय रोग उन्मूलन के लिए टीबी के मरीजों का पंजीकरण निक्षय पोर्टल पर किया जाएगा। सभी मरीजों की एक यूनिक आईडी बनेगी। मरीज देश के किसी भी कोने में रहेगा और दवा खाने में गैप हुआ तो विभागीय अधिकारियों को कम्प्यूटर इसके लिए एलर्ट करेगा। स्वास्थ्य कार्यकर्ता ऐसे मरीजों को ढूंढ़कर दवा खिलाएंगे। जानकारों का मानना है कि ऐसे में टीबी का संक्रमण नहीं फैलेगा और इस रोग का देश से उन्मूलन हो जाएगा। मौजूदा समय में जिले में टीबी के 2061 मरीज पंजीकृत हैं।
टीबी के मरीजों के इलाज के लिए जिले में टीबी अस्पताल के अलावा सभी पीएचसी पर डाट्स सेंटर की स्थापना की गई है। मरीज खुद से अस्पताल आकर दवा खाते हैं और जो मरीज अस्पताल नहीं आ सकते उन्हें स्वास्थ्य कार्यकर्ता घर पर जाकर दवा खिलाते हैं। लेकिन अब इस बीमारी को जड़ से खत्म करने के लिए तैयारी की गई है। इसके लिए निजी चिकित्सकों को भी इस अभियान में शामिल किया जाएगा। मरीज कहां से इलाज कर रहा है और उसके दवा खाने की अगली तिथि क्या है यह सब इस पोर्टल के माध्यम से कम्प्यूटर बताएगा। अगर जौनपुर का कोई मरीज यहां से दिल्ली, मुंबई या कोलकाता समेत देश के अन्य किसी भी शहर में जाता है तो पोर्टल पर उसकी यूनिक आईडी डालने पर उसके इलाज का सारा रिकार्ड कम्प्यूटर स्क्रीन पर आ जाएगा और डाक्टर वहीं पर उसका इलाज कर सकेंगे।
यही नहीं बाहर जाकर मरीज ने दवा खाना छोड़ दिया तो भी ड्यू डेट पर दवा खाने का विवरण जब पोर्टल पर दर्ज नहीं होगा तो कम्प्यूटर एलर्ट कर देगा। एलर्ट आने पर संबंधित की तलाश शुरू हो जाएगी और उसे दवा खिलाई जाएगी।