जौनपुर। मौसम में लगातार बदलाव आ रहा है। बुधवार को ठंड ने पिछले 10 दिनों का रिकार्ड तोड़ दिया। शाम होते-होते गलन अधिक बढ़ गई थी। न्यूनतम तापमान 6 डिग्री सेल्सियस तक गिर गया था। बाजारों में सन्नाटा पसर गया था। हाइवे पर भी गिने-चुने वाहन भी आते-जाते दिखाई दे रहे थे।
सुबह कोहरे के कारण लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ा। सड़कों पर वाहन रेंगते नजर आ रहे थे। दिन में करीब 10 बजे धूप निकली, लेकिन, उससे लोगों को राहत नहीं मिल पा रही थी। दिन में धूप और आसमान में बादल का दौर चलता रहा। लेकिन, शाम साढ़े छह बजे के बाद गलन अत्यधिक बढ़ गई। कमरे में भी लोगों के हाथ-पांव ठिठुर जा रहे थे। लोग बिस्तर में चले गए हैं। वहीं, रोडवेज मछलीशहर, जौनपुर, और सिकरारा में यात्री बस के इंतजार में खड़े रहे। हालांकि इन स्थानों पर चाय की दुकानें खुली थी, जहां लोग शरीर में गर्मी के लिए चाय का सहारा ले रहे थे। वहीं, कृषि विज्ञान केंद्र बक्शा में तैनात वरिष्ठ वैज्ञानिक डा. सुरेश कुमार कन्नौजिया ने बताया कि आगामी दिनों में 22 से लेकर 25 जनवरी तक हल्की से मध्यम बारिश की संभावना बनी हुई हैं। इस दौरान बादल छाए रहेंगे। अधिकतम तापमान 16-21 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 5-8 डिग्री सेल्सियस के बीच रहेगी। अधिकतम आर्द्रता 77-98 के बीच रहने की संभावना है, जबकि न्यूनतम आर्द्रता 74-76 प्रतिशत रहेगी। हवा की गति 8-17 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से उत्तर पूरब से उत्तर पश्चिम दिशा की ओर चलने का अनुमान है । आगामी दिनों में ठंड एवं गलन बढ़ने के आसार हैं, रात्रि में धुंध और कोहरा छाए रहने का अनुमान है। उधर बुधावर को न्यूनतम तापमान 6 डिग्री सेल्सियस और अधिकतम तापमान 17 डिग्री सेल्सियस तक रहा। देखा जाए तो यह ठंड दिन रहा, क्योंकि 9-10 जनवरी तक 7 डिग्री सेल्सियस तक पारा गिरा था। वहीं, किसान बता रहे हैं कि मौसम की अनुकूलता के चलते इस साल उम्मीद थी कि रबी की फसल अच्छी होगी, लेकिन आसमान में कोहरा व बदली छाए रहने के चलते किसानों की पेशानी पर बल पड़ने लगा है। किसान विशाल यादव,संतोष यादव,संदीप सिंह, आदि ने बताया कि इस समय आलू की खेती को पाला व घने कोहरे के साथ झुलसा अंक मारी अर्ली ब्लाइट जैसी बीमारियों का खतरा होता है। इससे आलू की खेती करने वाले किसानों की चिंता बढ़ गई है। विकासखंड करंजाकला कृषि प्रभारी डॉ मुकेश कुमार ने बताया कि ठंड में आलू की फसल की विशेष देखभाल करने की जरूरत है। फसल की सिंचाई और उसके आसपास धुआं करके के पाले के प्रभाव को कम किया जा सकता है। किंटो और रोगों से बचाव पर भी विशेष ध्यान देने की जरूरत है।