वाजिदपुर तिराहे के पास बना सिटी टावर।
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वाजिदपुर तिराहे पर सात मंजिला इमारत सिटी टावर में निर्माण होने का मामला उजागर होने के बाद सिटी मजिस्ट्रेट के निर्देश पर मास्टर प्लान के जेई और कर्मचारी पहुंचे और काम कर रहे मजदूरों को भगा दिया। टीम निर्माण के कुछ सामान साथ ले गई। उधर, निर्माण को लेकर प्रशासन और सिटी टावर के मालिक के अगल-अलग दावे हैं।
वाजिदपुर तिराहे पर अगस्त 2005 से सिटी टावर का निर्माण शुरू हुआ है। उसी दौरान तत्कालीन नियम प्राधिकारी/सिटी मजिस्ट्रेट ने निर्माण कार्य रोकवा दिया था। जांच में अवर/सहायक अभियंता ने लिखा कि प्रस्तावित स्थल पार्क और प्ले ग्राउंड क्षेत्र में आता है।
इसलिए मानचित्र मार्च 2006 में निरस्त कर दिया गया। साथ ही अवैध निर्माण रोकने लिए नोटिस दिया गया। 26 मई 2006 को निर्माण ध्वस्त करने का भी आदेश जारी हुआ।
उधर, सिटी टावर के मालिक देवेंद्र कुमार मिश्रा का कहना है कि उन्होंने 2003 में छह विस्वा की इस भूमि का बैनामा दिवाकर पांडेय से कराया है। किसी नाले और सार्वजनिक जमीन पर उनका निर्माण नहीं है। तत्कालीन डीएम ने तहसीलदार, कानूनगो और लेखपाल की टीम से जांच कराई थी।
उन्होंने रिपोर्ट में लिखा है कि नाले और पार्क की जमीन पर अतिक्रमण नहीं किया जा रहा है।
बल्कि भूमिधरी पर निर्माण हो रहा है। उधर, प्रशासन का दावा है कि जिस भूमि पर सिटी टावर खड़ा है, वह जौनपुर महायोजना 2021 में प्रस्तावित पार्क, प्ले ग्राउंड एवं ओपेन स्पेस के लिए आरक्षित है। प्रश्न यह है कि अगर देवेंद्र मिश्र का बैनामा सही है तो प्रशासन क्यों झूठ बोल रहा है। अमर उजाला ने इस मामले को उठाया तो नियत प्राधिकारी की टीम रविवार को सिटी टावर पहुंची और मजदूरों को फटकार लगाकर भगाया। इसे लेकर लोगों में चर्चाएं होती रहीं।