जौनपुर। सूर्योपासना का महापर्व छठ बुधवार को नहाय खाय के साथ शुरू हो गया। पहले दिन महिलाओं ने स्नान के बाद छठ व्रत का संकल्प लिया। पूरे दिन उपवास के बाद पूजन कर चावल के साथ लौकी की सब्जी का प्रसाद ग्रहण किया। पूजा की तैयारियों को लेकर बाजारों में भीड़ बढ़ने लगी है। फल, सूप, दौरी की दुकानें सज गई हैं। इन पर खरीदारी भी शुरू हो गई है। घाटों के किनारे पूजा के लिए महिलाएं वेदी बनाने में में जुटी रहीं। छठ पर्व के दूसरे दिन बृहस्पतिवार को खरना पूजा पर महिलाएं गुड़ की खीर और पूड़ी का भोग लगाएंगी।
दीपावली के बाद से ही छठ पूजा का उल्लास छाया हुआ है। पूजा के लिए नई साड़ी, कपड़े व अन्य सामानों की खरीदारी हो रही है तो घाटों की साफ-सफाई भी जोरों पर है। शहर के ज्यादातर घाटों पर सफाई कार्य पूरा हो चुका है। वहां अलग-अलग घेरे भी बनाए जा रहे हैं। विभिन्न समितियों ने सहायतार्थ शिविर भी लगाने की तैयारी की है। प्रमुख घाटों पर नगर पालिका की ओर से अस्थाई शौचालय व महिलाओं के लिए चेंजिंग रुम का इंतजाम कराया जा रहा है। नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी संतोष मिश्र ने बताया कि घाटों पर जरुरी सुविधाएं मुहैया कराई जा रही है। स्थानीय समितियों का भी सहयोग लिया जा रहा है। कोरोना से बचाव के दिशा निर्देशों का पालन कराने की पूरी कोशिश रहेगी। उधर, घरों में भी छठ पूजा को लेकर तैयारी जोरों पर है।
सौ रुपये तक पहुंचा सेब, अन्य फलों के दाम भी बढ़े
छठ पूजा पर फलों की मांग बढ़ने के साथ ही दाम में भी इजाफा होने लगा है। सेब के दाम 80 से बढ़कर सौ रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है। अनार 140-160 रुपये तक, संतरा 80 रुपये, नाशपाती 160-200 रुपये किलो, अन्नानास 30-50 रुपये प्रति पीस, केला 50 रुपये दर्जन, तरबूज 40-50 रुपये पीस और पपीता 40-50 रुपये प्रति किलो बिक रहा है। बुधवार को लौकी की खूब बिक्री हुई। लिहाजा इसके दाम भी बढ़े रहे। सामान्य दिनों में 16-20 रुपये प्रति किलो बिकने वाला लौकी 24-30 रुपये किलो तक बिका।
बसों के लिए परेशान रहे यात्री
जौनपुर। छठ पूजा के मद्देनजर यात्रियों की संख्या लगातार बढ़ रही है, बावजूद रोडवेज बसों की संख्या जस की तस है। ऐसे में यात्रियों को दुश्वारी झेलनी पड़ रही है। बुधवार को डिपो से 69 बसों का संचालन हुआ। आजमगढ़, गोरखपुर, मिर्जापुर, वाराणसी और ग्रामीण क्षेत्र की बसों में सफर के लिए मारामारी मची रही। रोडवेज डिपो और जेसीज चौराहे के समीप यात्रियों की भीड़ लगी थी। गिनती की बसेें होने से उसमें सवार होने के लिए लोग जूझते रहे। सोशल डिस्टेंसिंग के मानक को धता बताते हुए लोगों ने बसों में सफर किया।