जौनपुर। लखनऊ के रिवर फ्रंट की तर्ज पर शहर के मध्य से गुजरी गोमती नदी के घाटों पर सुंदरीकरण का काम चल रहा है। लेकिन, इस प्रोजेक्ट के चलते नदी की धारा को शाही पुल के कुछ हिस्से से परिवर्तित कर दिया गया है। जिसकी शिकायत विधान परिषद में भी हुई है। जहां से खुद सभापति विद्या सागर सोनकर ने जनपद से प्रशासन की तरफ से गए सीआरओ रजनीश राय को निर्देशित किया कि वे यह सुनिश्चित कराए कि नदी की धारा को अवरुद्ध करके कार्य न कराया जाए। बल्कि लखनऊ के रिवर फ्रंट की तर्ज पर काम कराया जाएगा, जहां पूरे प्रोजेक्ट में नदी की धारा को परिवर्तित नहीं किया गया है।
शहर के मध्य गोमती नदी पर बने शाही पुल से भी जनपद पहचान होती है। इस पुल से गोमती नदी का पानी गुजरता है। इसके लिए पुल में ताखे बनाए गए हैं। हालांकि इस समय 9 ताखे हैं, जिनसे नदी का पानी गुजरता है। लेकिन, बारिश के दिनों में नदी के उफान पर आने से जलस्तर तेजी से बढ़ता है। इधर गोमती नदी के घाटों के सुंदरीकरण का प्रस्ताव कई वर्षों से तैयार किया जा रहा था, जो क्षेत्रीय विधायक व राज्यमंत्री गिरीश चंद्र यादव के प्रयास से जुलाई माह के अंत तक शुरू करा दिया गया। इस प्रोजेक्ट को लखनऊ के गोमती रिवरफ्रंट की तर्ज पर तैयार कि या गया है। इसके लिए शासन ने राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन-नमामि गंगे परियोजना के अंतर्गत 8.05 करोड़ रुपए स्वीकृत किया है। इसके तहत सद्भावना पुल से हनुमान घाट होते हुए बजरंग घाट तक 650 मीटर के दायरे में रीवर फ्रंट डेवलपमेंट का कार्य होना है। प्रोजेक्ट पर काम तेजी से चल रहा है। लेकिन, हनुमान घाट के पास शाही पुल के एक ताखे को बंद कर पाथ वे बना दिया गया है। स्वच्छ गोमती अभियान के अध्यक्ष गौतम गुप्ता ने आरोप लगाया कि यह योजना अदूरदर्शिता का शिकार हो गई है। नदी की जलधारा को इस प्रकार अवरुद्ध कर काम किया जाना, स्पष्ट रूप से एनजीटी के नियमों का उल्लंघन है। क्योंकि एनजीटी ने अपने निर्देश में स्पष्ट कर रखा है कि, ‘पूरे देश में नदी सुंदरीकरण की किसी भी प्रकार की योजना के दौरान न तो नदी की जलधारा को अवरुद्ध किया जाएगा, न मोड़ा जाएगा और न ही किसी भी दशा में उसके वास्तविक स्वरूप से कोई छेड़छाड़ की जाएगी’ । जबकि मौके पर यह सभी गड़बड़ियां विद्यमान हैं, जो कि बेहद चिंताजनक हैं। ऐसे में इस प्रोजेक्ट की बेहद गम्भीर व उच्चस्तरीय तकनीकी समीक्षा किया जाना बेहद आवश्यक है। ताकि गोमती की पवित्र जलधारा के अस्तित्व को बचाया जा सके। क्योंकि, इसी साल अगस्त माह में गोमती नदी का जल स्तर अचानक बढ़ गया था, जिसके कारण यह पूरा प्रोजेक्ट पानी में डूब गया था। इससे कारण काम बंद करना पड़ा। नदी का पानी सामान्य हुआ तो काम शुरू हुआ। लेकिन, सितंबर माह में फिर गोमती नदी का जल स्तर अचानक बढ़ा और पूरा प्रोजेक्ट पानी में डूब गया। ऐसे में भविष्य में पुल के ताखा बंद होने और प्रोजेक्ट के कारण नदी के जलधारा के अंदर काम करने से पानी का दबाव बनेगा, जिससे दिक्कत होगी।
------
नदी के अंदर 40 फीट धारा को किया गया है परिवर्तित
जौनपुर। स्वच्छ गोमती अभियान के अध्यक्ष गौतम गुप्ता का कहना है कि मां गोमती के मूल स्वरूप व अस्तित्व के हितों की रक्षा के लिए हर स्तर की लड़ाई लड़ी जाएगी। मामले को विधान परिषद की समिति में पहुंचा दिया गया है। अगर जरूरत पड़ी तो एनजीटी में भी मामला उठाया जाएगा। क्योंकि नदी की जलधारा में लगभग 40 फीट तक घुसकर पानी के बहाव को महीनों से अवरुद्ध किया गया है।
-------
अधिकारियों की अदूरदर्शिता का यह परिणाम है। इस तरह नदी की धारा अवरोध करना ठीक नहीं है। इसके लिए समिति की बैठक में निर्देशित भी किया गया है। मैं इसी जनपद से हूं, इस नाते खुद अधिकारियों से इस संबंध में बात करूंगा। हालांकि लखनऊ के रिवर फ्रंट की तर्ज पर काम कराया जाना चाहिए, जहां पूरे प्रोजेक्ट में नदी की धारा को परिवर्तित नहीं किया गया है।- विद्यासागर सोनकर, सभापति, विधान परिषद
----
नमामि गंगे परियोजना के प्रोजेक्ट मैनेजर से इस संबंध में फोन पर बात किया हूं। उन्होंने बताया कि नगर पालिका और सिंचाई विभाग से एनओसी लेने के बाद यह कार्य किया जा रहा है। मैंने पेपर मांगा है,जिसे मिलने के बाद विधान परिषद की समिति को स्थिति से अवगत करा दूंगा।- रजनीश राय, सीआरओ