जौनपुर। जिले में कोरोना के मरीजों की संख्या में तेजी से इजाफा हो रहा है। इसके साथ ही उनके उपचार में उदासीनता भी बढ़ी है। सैंपल लेने और उपचार में लापरवाही बरती जा रही है। सूचनाओं पर त्वरित कदम उठाने की बजाए टालमटोल किया जा रहा है।
कोरोना का संक्रमण रोकने के लिए एक तरफ हर तरह के सतर्कता बरतने पर जोर दिया जा रहा है। आम लोगों से अपील की जा रही है कि बाहर से आने वाले किसी शख्स में सर्दी, खांसी, बुखार, सांस फूलने जैसी समस्या हो तो वह तत्काल कंट्रोल रूम को सूचना दे। अस्पताल पहुंचकर जांच कराए। दूसरी ओर शिकायत के बाद भी कई जगह जांच और उपचार में हीलाहवाली की जा रही है। आए दिन ऐसी शिकायतें आ रही हैं। विभाग की सुस्ती के चलते ही तीन संदिग्धों को जान भी गंवानी पड़ी है। मौत के बाद इनमें से दो में कोरोना की पुष्टि हुई। तीसरे का सैंपल ही यह कहकर नहीं लिया गया कि उसे कोरोना नहीं था, जबकि उसके संपर्क में आए दो बेटों की रिपोर्ट सोमवार को कोरोना पॉजीटिव आई है। मंगलवार को सिंगरामऊ, शाहगंज, धर्मापुर क्षेत्र से संदिग्ध हाल में मौत के बाद लोगों ने जागरूकता दिखाते हुए सूचना दी। उनका दावा था कि मरने वाले के लक्षण बिलकुल कोरोना जैसे ही हैं, बावजूद स्वास्थ्य विभाग के लोग दूसरी बीमारी बताकर पल्ला झाड़ने में लगे रहे। इस बाबत सीएमओ डॉ. रामजी पांडेय ने बताया कि सैंपल सिर्फ उसी का लिया जा रहा है, जिसमें कोरोना के लक्षण साफ दिख रहे हों या फिर वह ऐसे किसी व्यक्ति के संपर्क में आया था। बहुत सी सूचनाएं ऐसी भी आती हैं, जिन्हें सामान्य बीमारी होती है। विभागीय कर्मी पूरी सतर्कता के साथ अपनी ड्यूटी निभा रहे हैं।
केस एक:
रामपुर ब्लाक के सुरेरी गांव में 16 मई को मुंबई से आए शख्स में सर्दी, खांसी और बुखार की शिकायत हुई। वह अस्पताल पहुंचा तो भीड़ के कारण उसकी जांच नहीं हो पाई। सामान्य दवाएं लेकर वह घर आ गया। 20 मई को तबीयत बिगड़ने पर अस्पताल ले जाया गया, मगर कुछ देर बाद उसकी मौत हो गई। परिजन कोरोना का शक जताते रहे, मगर डॉक्टरों ने यह कहते हुए सैंपल लेने से इंकार कर दिया कि मौत टीबी से हुई है। बाद में उसके साथ मुंबई से यात्रा कर आए दोनों बेटों की रिपोर्ट कोरोना पॉजीटिव आई। अब आशंका जताई जा रही है कि अधेड़ की मौत भी कोरोना से ही हुई होगी।
केस दो:
जलालपुर के बयालसी इंटर कॉलेज में बने क्वारंटीन सेंटर में रखे गए केराकत के कादीपुर निवासी अधेड़ की 23 मई को मौत हो गई। वह 16 मई को मुंबई से आया था और तब से इसी सेंटर में रह रहा था। उसे सर्दी, खांसी की दिक्कत थी, मगर उपचार की कोई व्यवस्था नहीं हो गई। 19 मई को तबीयत बिगड़ने पर उसका सैंपल लिया गया। लगातार उसकी हालत बिगड़ती रही, मगर जरुरी उपचार के इंतजाम नहीं हुए। क्वारंटीन सेंटर के प्रभारी ने उच्चाधिकारियों को लिखित सूचना देते हुए उपचार कराने की जरुरत बताई, लेकिन नतीजा सिफर रहा। 23 मई को जब मौत हुई तो उसके कुछ देर बाद रिपोर्ट पॉजीटिव आने पर जिम्मेदार सन्न रह गए।